आधार राष्ट्रीय पहचान प्रणाली

संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने साइबर सुरक्षा और एआई-संचालित खतरों से निपटने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना आधार राष्ट्रीय पहचान प्रणाली के लिए एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट और टेस्टिंग अभियान शुरू किया।
आधार राष्ट्रीय पहचान प्रणाली क्या हैं?
आधार (Aadhaar) राष्ट्रीय पहचान प्रणाली भारत सरकार द्वारा स्थापित दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक-आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली है। यह भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) का केंद्रीय आधार स्तंभ है, जो देश के प्रत्येक निवासी को एक अनूठी और अपरिवर्तनीय डिजिटल पहचान प्रदान करता है।
- आधार भारत के प्रत्येक निवासी (नागरिक होना अनिवार्य नहीं) को जारी की जाने वाली 12-अंकीय एक अद्वितीय यादृच्छिक संख्या (Unique Random Number) है।
- यह संख्या व्यक्ति के न्यूनतम जनसांख्यिकीय और अचूक बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर तैयार की जाती है, जो देश में कहीं भी पहचान और पते के प्रमाण के रूप में कानूनी रूप से मान्य है।
- इस प्रणाली का निर्माण और प्रबंधन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा किया जाता है।
- UIDAI एक वैधानिक प्राधिकरण है, जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत ‘आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडियों, लाभों और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016’ के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य उद्देश्य:
- अद्वितीय पहचान प्रदान करना: भारत के प्रत्येक निवासी को एक ऐसी एकल पहचान देना, जिसे न तो डुप्लिकेट (Duplicate) किया जा सके और न ही जाली (Fake) बनाया जा सके।
- लीकेज और बिचौलियों को समाप्त करना: सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सबसिडी वितरण में से ‘भूतिया लाभार्थियों’ (Ghost Beneficiaries) को हटाकर वास्तविक लाभार्थियों तक सीधा लाभ पहुंचाना।
- वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): बैंकिंग सेवाओं से वंचित दूरदराज के ग्रामीण नागरिकों को केवल उनकी डिजिटल पहचान के माध्यम से वित्तीय प्रणाली की मुख्यधारा से जोड़ना।
- सुशासन (e-Governance) की स्थापना: सरकारी सेवाओं के वितरण को पूरी तरह से डिजिटल, त्वरित, पारदर्शी और पेपरलेस बनाना।
विशेषताएं:
- द्वि-स्तरीय डेटा संग्रह: आधार दो प्रकार के मजबूत डेटा पर काम करता है:
- जनसांख्यिकीय डेटा: नाम, जन्मतिथि, लिंग, आवासीय पता, मोबाइल नंबर और ईमेल।
- बायोमेट्रिक डेटा: दोनों हाथों की 10 उंगलियों के निशान (Fingerprints), दोनों आंखों की पुतलियों का स्कैन (Iris Scan) और चेहरे की तस्वीर।
- सुरक्षित ऑफलाइन सत्यापन (Offline Verification): प्राइवेसी को सुदृढ़ करने के लिए UIDAI ने ऐसी प्रणाली विकसित की है जिससे बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी संस्थाएं सुरक्षित क्यूआर (QR) कोड और चेहरे के मिलान (Face Authentication) से ऑफलाइन पहचान सत्यापित कर सकती हैं।
- गोपनीयता सुरक्षा (Enhanced Privacy Setup): नवीनतम सुरक्षा मानकों के तहत अब भौतिक आधार कार्ड पर पूर्ण पता या पूरी जन्मतिथि प्रदर्शित नहीं की जाती, जिससे व्यक्तिगत डेटा की चोरी रोकी जा सके।
- बायोमेट्रिक लॉक सुविधा: डिजिटल नागरिक ‘एम-आधार’ (mAadhaar) ऐप या पोर्टल के माध्यम से अपनी बायोमेट्रिक सूचनाओं को खुद लॉक और अनलॉक कर सकते हैं, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी या क्लोनिंग की संभावना समाप्त हो जाती है।
- सुरक्षा ऑडिट और एआई टेस्टिंग: उभरते साइबर व एआई खतरों से निपटने के लिए UIDAI ने राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ साझेदारी की है और साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In के समन्वय से प्रणालियों की नियमित टेस्टिंग की जा रही है।
महत्व:
- लक्षित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Targeted Direct Benefit Transfer – DBT): इसके माध्यम से जनधन खातों और मोबाइल के एकीकरण (JAM ट्रिनिटी) से पीएम-किसान, एलपीजी जैसी सैकड़ों योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाता है, जिससे देश के राजस्व की भारी बचत हुई है।
- आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS): AEPS ने ग्रामीण क्षेत्रों का बैंकिंग मॉडल बदल दिया है। देश के लाखों सूक्ष्म-एटीएम केवल बायोमेट्रिक सत्यापन पर कैश विड्रॉल और फंड ट्रांसफर की सुविधा दे रहे हैं।
- ई-केवाईसी (e-KYC) द्वारा व्यापार सुगमता: बैंक खाते खोलने, वित्तीय निवेश या मोबाइल सिम कार्ड लेने के लिए तत्काल डिजिटल सत्यापन ने व्यवसायों की ऑनबोर्डिंग लागत को 90% तक कम कर दिया है।
- वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC): देश का कोई भी प्रवासी मजदूर केवल अपने आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के बल पर भारत के किसी भी राज्य से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अनाज प्राप्त कर सकता है।