खावड़ा विशाल बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली

संदर्भ:
हाल ही में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने गुजरात के खावड़ा में 3.37 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता वाले विशाल बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का उद्घाटन किया।
खावड़ा विशाल बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के बारे मे:
- परिचय: गुजरात के खावड़ा में स्थापित बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थान (single-location) बैटरी परियोजना है। यह सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करती है।
-
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System – BESS) एक प्रकार की इलेक्ट्रोकेमिकल (विद्युत रासायनिक) ऊर्जा भंडारण तकनीक है। यह सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को बैटरियों के बड़े समूहों में रासायनिक रूप से संग्रहीत करती है और मांग बढ़ने पर उसे वापस ग्रिड में भेजती है।
- इसका विकास भारत की अग्रणी निजी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) द्वारा किया गया है।
- ऑन-साइट निर्माण शुरू होने के मात्र 10 महीनों के रिकॉर्ड समय के भीतर इसे चालू किया गया। यह वैश्विक स्तर पर यूटिलिटी-स्केल परियोजनाओं में सबसे तेज़ निर्माणों में से एक है।
मुख्य उद्देश्य:
- अस्थिरता का समाधान: सौर ऊर्जा (दिन) और पवन ऊर्जा (शाम/रात) की रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति को स्थिर करना।
- पीक डिमांड प्रबंधन: शाम के समय जब बिजली की मांग चरम पर होती है, तब संग्रहीत ऊर्जा से निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- ग्रिड स्थिरता: ग्रिड की आवृत्ति (Frequency Control) को बनाए रखना और अचानक होने वाले लोड परिवर्तनों या आपातकालीन ग्रिड विफलता से बचाना।
विशेषताएं:
- कुल क्षमता (Capacity): संचयी रूप से 3.37 गीगावाट-घंटे (GWh) की परिचालन क्षमता, जिसमें मार्च 2026 में जोड़ी गई 1.37 GWh क्षमता भी शामिल है।
- प्रौद्योगिकी (Technology): इसमें उन्नत लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसे अत्याधुनिक ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली (Energy Management System – EMS) से एकीकृत किया गया है।
- परियोजना क्षेत्र (Area): यह भंडारण सुविधा खावड़ा के विशाल हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का हिस्सा है, जो कच्छ के बंजर रेगिस्तान में 538 वर्ग किलोमीटर (sq km) में फैला हुआ है। यह क्षेत्रफल पेरिस शहर से पांच गुना बड़ा और मुंबई के बराबर है।
- इकोसिस्टम: खावड़ा पार्क का लक्ष्य 2029 तक 30 GW स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का है, जिसमें से 9.9 GW क्षमता पहले से चालू है।
- आपूर्ति क्षमता: यह प्रणाली इतनी विशाल है कि लगभग 10 लाख घरों को पूरे एक दिन के लिए पर्याप्त स्वच्छ बिजली दे सकती है।
- शहरी प्रतिस्थापन: यह अकेले गोवा जैसे पूरे राज्य या इंदौर और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों की पीक-आवर मांग को पूरा करने की क्षमता रखती है।
- दीर्घकालिक प्रभाव: यह प्रणाली 1.2 करोड़ (12 Million) से अधिक एलईडी बल्बों को लगातार 10 घंटे तक जलाए रख सकती है।
- सुदृढ़ीकरण: यह भंडारण परियोजना खावड़ा में स्थित 30 गीगावाट (GW) के दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का हिस्सा है। वर्तमान में यहां 9.9 GW क्षमता पहले से ही चालू है।
महत्व:
- रिन्यूएबल से ‘डिस्पैचेबल’ ऊर्जा: यह तकनीक अस्थिर (Intermittent) सौर और पवन बिजली को एक विश्वसनीय, नियंत्रणीय और ‘राउंड-द-क्लॉक’ (24/7) बिजली बुनियादी ढांचे में बदल देती है।
- राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान: भारत ने COP26 में 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य रखा था। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, 2031-32 तक भारत को 411.4 GWh भंडारण की आवश्यकता होगी, जिसमें खावड़ा BESS एक मजबूत आधारशिला है।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम: इसके चालू होने से कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पर देश की निर्भरता कम होगी, जिससे भारत के ‘नेट-जीरो 2070’ उत्सर्जन लक्ष्य को गति मिलेगी।
- भविष्य का रोडमैप: अडानी ग्रीन का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में 10 GWh से अधिक अतिरिक्त स्टोरेज जोड़ने और अगले 5 वर्षों में इसे 50 GWh तक पहुंचाने का है।