Debrigarh Wildlife Sanctuary

संदर्भ:
इस वर्ष 8 और 9 मार्च 2026 को ओडिशा का देबरीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Debrigarh Wildlife Sanctuary) द्वारा ‘इंडियन बाइसन फेस्ट’ (Indian Bison Fest) के दूसरे संस्करण की मेजबानी की जाएगी। इस फेस्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय बाइसन के बढ़ते संरक्षण और जनसंख्या के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
- इस वर्ष के संस्करण में नाइट कैंपिंग और खगोल दर्शन को शामिल किया गया है। इसके अलावा, प्रतिभागियों को ‘बैट आइलैंड’ का दौरा और जलाशय में क्रूज सफारी का अनुभव भी मिलेगा।
देबरीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के बारे में:
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- स्थान: यह ओडिशा के बरगढ़ जिले में हीराकुंड बांध (महानदी नदी) के पास स्थित है।
- घोषणा: इसे 1985 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। हाल ही में इसे भारत का 54वां टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
- ऐतिहासिक महत्व: यह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साय से जुड़ा है, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह के दौरान यहाँ ‘बारापथरा’ को अपना आधार बनाया था।
- विस्तार: यह लगभग 353 वर्ग किमी (कोर क्षेत्र) में फैला है और प्रसिद्ध हीराकुंड जलाशय (महानदी) के किनारे स्थित है।
- जैव विविधता: यहाँ बाइसन के अलावा तेंदुए, चौसिंगा (Four-horned antelope), और स्लॉथ बियर पाए जाते हैं। हीराकुंड जलाशय के कारण यहाँ सर्दियों में 4 लाख से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं।
- वनस्पति: मुख्य रूप से ‘शुष्क पर्णपाती मिश्रित वन’ पाए जाते हैं, जिनमें साल, बीजा और धौरा के वृक्ष बहुतायत में हैं।
- टाइगर रिजर्व का दर्जा: जुलाई 2025 में, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने देबरीगढ़ को ओडिशा का तीसरा टाइगर रिजर्व बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। यह सिमिलिपाल और सतकोसिया के बाद राज्य का अगला प्रमुख बाघ निवास स्थान होगा।
- बाइसन (गौर) जनसंख्या में उछाल: जनवरी 2026 की जनगणना के अनुसार, यहाँ भारतीय बाइसन की संख्या बढ़कर 848 हो गई है। पिछले एक वर्ष में इसमें 28% की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है, जो यहाँ के उत्कृष्ट आवास प्रबंधन (Habitat Management) को दर्शाता है।
- नवाचारी पर्यटन: देबरीगढ़ अब भारत का पहला डार्क स्काई टूरिज्म (Dark Sky Tourism) हब बन गया है, जहाँ खगोल दर्शन (Stargazing) के लिए विशेष ‘कांच की छत’ वाले कमरे उपलब्ध हैं।
- सामुदायिक मॉडल: देबरीगढ़ को ‘जीरो विलेज’ (Zero Village) अभयारण्य बनाया गया है, जहाँ 400 से अधिक परिवारों का शांतिपूर्ण पुनर्वास किया गया। अब ये स्थानीय लोग ही गाइड, सफारी ड्राइवर और होमस्टे प्रबंधक के रूप में काम करते हैं।
इंडियन बाइसन या भारतीय गौर (Bos gaurus):
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