National Dental Commission
संदर्भ:
भारत सरकार ने दंत चिकित्सा (डेंटिस्ट्री) क्षेत्र में बड़े विनियामक सुधार करते हुए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) को भंग कर उसके स्थान पर राष्ट्रीय दंत आयोग (National Dental Commission – NDC) का गठन किया।
पृष्ठभूमि और संवैधानिक बदलाव:
- अधिनियम का निरस्तीकरण: राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के लागू होने के साथ ही डेंटिस्ट्स एक्ट, 1948 को निरस्त कर दिया गया है।
- प्रभावी तिथि: आयोग का गठन और DCI का विघटन 19 मार्च 2026 से प्रभावी हो गया है।
- दृष्टिकोण: यह सुधार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की तर्ज पर किया गया है, जिसने पूर्व में भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) का स्थान लिया था।
आयोग की संरचना:
राष्ट्रीय दंत आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और इसमें कुल 33 सदस्य होंगे:
- अध्यक्ष (Chairperson): एक प्रतिष्ठित और अनुभवी दंत चिकित्सक, जिसकी नियुक्ति कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली खोज-सह-चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। डॉ. संजय तिवारी को इसका पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- पदेन सदस्य (Ex-officio Members): इसमें स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, एम्स (AIIMS) के दंत शिक्षा केंद्र के प्रमुख और तीन स्वायत्त बोर्डों के अध्यक्ष शामिल होते हैं।
- अंशकालिक सदस्य (Part-time Members): राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि तथा दंत चिकित्सा संकाय के सदस्य।
तीन स्वायत्त बोर्ड (Autonomous Boards):
आयोग के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन स्वतंत्र बोर्ड गठित किए गए हैं:
- स्नातक और स्नातकोत्तर दंत शिक्षा बोर्ड (UG & PG Board): यह दंत शिक्षा के मानक तय करेगा, पाठ्यक्रम तैयार करेगा और शैक्षिक योग्यताओं को मान्यता देगा।
- दंत चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (DARB): यह दंत संस्थानों के निरीक्षण, उनकी रेटिंग और नए संस्थानों की स्थापना की अनुमति देने के लिए उत्तरदायी है।
- नैतिकता और दंत पंजीकरण बोर्ड (EDRB): यह दंत चिकित्सकों के राष्ट्रीय रजिस्टर का रखरखाव करेगा और पेशेवर आचरण व नैतिकता को विनियमित करेगा।
प्रमुख विशेषताएं:
- नेशनल एग्जिट टेस्ट (NExT-Dental): अब दंत चिकित्सा का अभ्यास करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने और पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक सामान्य ‘निकास परीक्षा’ अनिवार्य होगी।
- फीस विनियमन: आयोग के पास निजी दंत संस्थानों की 50% सीटों के लिए शुल्क (फीस) के दिशा-निर्देश निर्धारित करने की शक्ति होगी।
- दंत सलाहकार परिषद (Dental Advisory Council): एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा जहाँ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी चिंताओं को रख सकेंगे और समान पहुंच के लिए आयोग को सलाह देंगे।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: निर्वाचित निकाय (DCI) के स्थान पर अब चयन-आधारित (Merit-based) नियामक ढांचा लाया गया है, जिससे निर्णयों में पारदर्शिता आएगी।
- विदेशी दंत चिकित्सकों को अवसर: नए नियमों के तहत विदेशी नागरिकों को भी भारत में अस्थायी पंजीकरण के साथ अभ्यास करने का अवसर मिल सकता है।
