Amrabad Tiger Reserve
संदर्भ:
हाल ही में तेलंगाना सरकार ने अमराबाद टाइगर रिजर्व के कोर एरिया को मानव हस्तक्षेप से मुक्त (Inviolate) बनाने के लिए जनजातीय परिवारों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की। जिसके लिए सरकार ने ₹62.55 करोड़ के बजट के साथ पुनर्वास के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत की हैं।
अमराबाद टाइगर रिजर्व के बारे में:
- स्थान: यह तेलंगाना के नागरकुर्नूल और नलगोंडा जिलों में फैला हुआ है।
- क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,611.4 वर्ग किमी है। यह मुख्य क्षेत्र के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा और कुल क्षेत्रफल के हिसाब से छठा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
- इतिहास: 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले यह ‘नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व’ (NSTR) का हिस्सा था। विभाजन के बाद, इसके उत्तरी हिस्से को तेलंगाना में ‘अमराबाद टाइगर रिजर्व’ नाम दिया गया।
- नदी प्रणाली: कृष्णा नदी इस रिजर्व की जीवन रेखा है। इसके गहरे घाट और घाटियाँ श्रीशैलम और नागार्जुनसागर बांधों के लिए जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) बनाती हैं।
- भूभाग: यहाँ का इलाका ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों, गहरी घाटियों और सघन वनों से युक्त है।
- वनस्पति (Flora): यहाँ मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं, जिनमें सागौन (Teak), साल, बांस, और तेंदू (Diospyros melanoxylon) के पेड़ प्रमुख हैं। यहाँ औषधीय पौधों की 600 से अधिक प्रजातियाँ उपलब्ध हैं।
- वन्यजीव (Fauna):
- बाघ: 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ बाघों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है (13 नर, 20 मादा और 2 शावक)।
- अन्य जीव: तेंदुआ, सुस्त भालू (Sloth Bear), ढोले (Wild Dog), चौसिंगा, और सांभर।
- पक्षी: यहाँ पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियाँ हैं, जिनमें दुर्लभ पीले गले वाली बुलबुल (Yellow-throated Bulbul) शामिल है। [5, 6, 8, 9, 10, 11]
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स्वदेशी समुदाय: यह रिजर्व चेन्चू (Chenchu) जनजाति का घर है, जो एक ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (PVTG) है।
- चेन्चू लोग सदियों से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व में रहे हैं और शिकार व संग्रहण (Hunting-Gathering) पर निर्भर हैं।
- वे बाघ को अपना ‘देवता’ और ‘भाई’ मानते हैं, जिससे यहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष बहुत कम है।
संरक्षण और नवीनतम गतिविधियाँ:
- बाघ जनगणना (AITE 2026): जनवरी 2026 में ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान’ अभ्यास के तहत यहाँ व्यापक सर्वेक्षण किया गया।
- पर्यटन: इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए सफारी रूट (जैसे कोल्लम सफारी) शुरू किए गए हैं। वर्तमान में फरहाबाद, गुंडम और अक्कमहादेवी गुफाओं के सफारी सर्किट सक्रिय हैं।
चुनौतियाँ:
- खनिज खनन: अतीत में यहाँ यूरेनियम खनन के प्रस्तावों का कड़ा विरोध हुआ है, क्योंकि यह पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा सकता है।
- वनाग्नि: शुष्क मौसम के दौरान जंगल की आग यहाँ की जैव विविधता के लिए एक बड़ा खतरा बनी रहती है।
- संसाधनों की कमी: कर्मचारियों की कमी और बुनियादी सुविधाओं (जैसे पशु चिकित्सा टीम) का अभाव संरक्षण प्रयासों में बाधा डालता है।
