Bab al-Mandeb Strait
संदर्भ:
हाल ही में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका खर्ग द्वीप सहित उसके क्षेत्र के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो वह बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बाधित कर सकता है।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के बारे में:
- नाम का अर्थ: आंसुओं का द्वार (Gate of Tears)।
- कनेक्टिविटी: यह जलडमरूमध्य उत्तर-पश्चिम में लाल सागर (Red Sea) को दक्षिण-पूर्व में अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) और हिंद महासागर से जोड़ता है।
- विभाजक: यह अरब प्रायद्वीप (एशिया) को हॉर्न ऑफ अफ्रीका (अफ्रीका) से अलग करता है।
- तटीय देश: इसके एक ओर यमन (एशिया) और दूसरी ओर जिबूती तथा इरिट्रिया (अफ्रीका) स्थित हैं।
- मुख्य चोकपॉइंट: स्वेज नहर तक पहुँचने का एकमात्र दक्षिणी द्वार।
- संकीर्णता: इसकी कुल चौड़ाई लगभग 29-32 किमी है। इसके बीच में पेरिम द्वीप (Perim Island) स्थित है, जो इसे दो चैनलों में विभाजित करता है: ‘बाब इस्कंदर’ (2 मील चौड़ा) और ‘दक्का अल-मयूं’ (16 मील चौड़ा)।
- ‘प्रॉक्सी’ रणनीति: हालांकि ईरान की सीमा इस जलडमरूमध्य से नहीं लगती, लेकिन वह यमन के हूती विद्रोहियों के माध्यम से इस मार्ग को नियंत्रित या बाधित करने की क्षमता रखता है।
आर्थिक और सामरिक महत्व:
- ऊर्जा का महामार्ग: वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 12% इसी मार्ग से गुजरता है। 2025 की पहली छमाही में यहाँ से तेल का प्रवाह हूती हमलों के कारण 50% से अधिक गिरकर 4.0 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है।
- व्यापारिक धमनी: यह दुनिया का चौथा सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है। वैश्विक व्यापार का लगभग 10-12% लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से इसी मार्ग से गुजरता है।
- सैन्य उपस्थिति: प्रमुख समुद्री मार्गों, स्वेज नहर की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जिबूती में अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों के स्थायी सैन्य अड्डे हैं।
भारत पर प्रभाव:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपने कच्चे तेल के आयात के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है। मार्ग बाधित होने से भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- निर्यात संकट: भारत का यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के साथ होने वाला व्यापार (खासकर कृषि उत्पाद और कपड़े) महंगा हो जाएगा क्योंकि जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से घूमकर जाना पड़ेगा, जिससे 15-20 दिनों की देरी होगी।
