14th WTO Ministerial Meeting
संदर्भ:
हाल ही में 26 से 30 मार्च 2026 तक कैमरून की राजधानी याओंडे में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) आयोजित किया गया।
WTO की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक के बारे में:
- स्थान और अध्यक्षता: यह सम्मेलन कैमरून के याओंडे में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वहाँ के व्यापार मंत्री लुक मैगलोइरे म्बर्गा अतांगाना ने की।
- प्रतिभागी: WTO के सभी 166 सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। हाल ही में कोमोरोस और तिमोर-लेस्ते के जुड़ने के बाद यह पूर्ण सदस्यता के साथ पहला बड़ा सम्मेलन था।
- महत्व: मंत्रिस्तरीय सम्मेलन WTO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जो सामान्यतः हर दो साल में मिलता है।
प्रमुख एजेंडा और चर्चा के विषय:
- WTO सुधार: अमेरिका द्वारा अपीलीय निकाय (Appellate Body) के जजों की नियुक्ति रोकने के कारण ठप पड़ी विवाद निवारण प्रणाली को पुनर्जीवित करना सबसे बड़ी चुनौती रही।
- कृषि और खाद्य सुरक्षा: भारत जैसे विकासशील देशों ने सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH) के लिए स्थायी समाधान की मांग प्रमुखता से उठाई ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी योजनाओं को संरक्षण मिल सके।
- मत्स्य पालन सब्सिडी (Fisheries Subsidies): अवैध और अनियंत्रित मछली पकड़ने पर रोक लगाने वाले 2022 के समझौते के दूसरे चरण (Phase II) पर चर्चा हुई, जिसमें भारत ने छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए 25 वर्ष की संक्रमण अवधि की मांग की।
- ई-कॉमर्स मोरेटोरियम: डिजिटल लेनदेन पर सीमा शुल्क न लगाने की समय-सीमा 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही थी। विकसित देश इसे स्थायी बनाने के पक्ष में थे, जबकि भारत और दक्षिण अफ्रीका ने राजस्व हानि का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
- निवेश सुविधा समझौता (IFD): चीन समर्थित इस बहुपक्षीय समझौते को WTO के कानूनी ढांचे में शामिल करने का प्रयास किया गया, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया क्योंकि यह ‘बहुपक्षीय’ जनादेश के बाहर है।
भारत का दृष्टिकोण:
भारत ने स्वयं को ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया। भारत की मुख्य प्राथमिकताएँ निम्नलिखित रहीं:
- खाद्य संप्रभुता: करोड़ों छोटे किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए PSH पर स्थायी समाधान की जिद।
- विशेष और विभेदित व्यवहार (S&DT): विकासशील देशों के लिए लचीले नियमों और लंबी कार्यान्वयन अवधि की वकालत।
- डिजिटल संप्रभुता: डिजिटल व्यापार में अपनी नीतियां बनाने के लिए ‘पॉलिसी स्पेस’ सुरक्षित रखना।
सम्मेलन के परिणाम:
- सहमति का अभाव: ई-कॉमर्स मोरेटोरियम और कृषि जैसे प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति नहीं बन पाई, जिससे चर्चा अब जिनेवा मुख्यालय में जारी रहेगी।
- सकारात्मक कदम: छोटे देशों को वैश्विक व्यापार प्रणाली में बेहतर तरीके से जोड़ने और स्वच्छता (SPS) तथा व्यापार की तकनीकी बाधाओं (TBT) से जुड़े नियमों में विकासशील देशों को रियायत देने पर सहमति बनी।
- पर्यावरण और व्यापार: प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ व्यापार के लिए एक ‘टेक्निकल पैकेज’ पेश किया गया।
