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भारतीय नौसेना का संशोधक सर्वेक्षण पोत

Modifier Survey Vessel of Indian Navy

Modifier Survey Vessel of Indian Navy

संदर्भ:

भारतीय नौसेना ने हाल ही में अपने अत्याधुनिक सर्वेक्षण पोत ‘संशोधक’ (Sanshodhak) को बेड़े में शामिल किया है। यह सर्वेक्षण पोत (विशाल) – SVL परियोजना का चौथा और अंतिम जहाज है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा को  सुदृढ़ करने में सहायक है। 

सर्वेक्षण पोत संशोधक के बारे में:

    • निर्माता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता। संशोधक का निर्माण L&T कट्टुपल्ली के सहयोग से किया गया है।
    • अर्थ: ‘संशोधक’ का अर्थ है ‘शोधकर्ता’ (Researcher), जो इसके प्राथमिक कार्य ‘समुद्री खोज और डेटा संग्रह’ को दर्शाता है। 
  • परियोजना: यह सर्वे वेसल (लार्ज) – SVL प्रोजेक्ट का चौथा जहाज है। 
    • इस परियोजना के तहत कुल 4 जहाज बनाए गए हैं – संध्याक (Sandhayak), निर्देशक (Nirdeshak), इक्षक (Ikshak) और संशोधक (Sanshodhak)

संशोधक की विशेषताएं:

  • विस्थापन (Displacement): लगभग 3,400 टन।
  • लंबाई और चौड़ाई: इसकी लंबाई 110 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है।
  • गति (Speed): दो शक्तिशाली डीजल इंजनों द्वारा संचालित, यह 18 समुद्री मील (Knots) से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
  • स्वदेशी सामग्री: इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (लागत के आधार पर) का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • विशेष उपकरण: यह जहाज स्वायत्त पानी के नीचे चलने वाले वाहन (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), मल्टी-बीम इको साउंडर्स और अत्याधुनिक डेटा अधिग्रहण प्रणाली से लैस है।

भूमिका: संशोधक को बहुआयामी कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है:

  • हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण (Primary Role): बंदरगाहों, नौगम्य चैनलों और तटीय क्षेत्रों का पूर्ण पैमाने पर सर्वेक्षण करना ताकि सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
  • डेटा संग्रह: रक्षा और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्र विज्ञान (Oceanographic) और भूभौतिकीय डेटा एकत्र करना।
  • सहायक भूमिका (Secondary Role): युद्ध या आपात स्थिति के दौरान इसे अस्पताल जहाज के रूप में उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, यह खोज और बचाव (SAR) और आपदा राहत (HADR) कार्यों में सक्षम है।
  • विमान संचालन: जहाज पर एक ध्रुव (HAL Dhruv) जैसे उपयोगिता हेलीकॉप्टर के लिए हैंगर और लैंडिंग की सुविधा है।

महत्व:

  • आत्मनिर्भरता: यह पोत भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता और MSMEs के साथ बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
  • समुद्री सुरक्षा (Maritime Security): सटीक चार्टिंग और डेटा संग्रह से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी।
  • नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy): बेहतर समुद्री मानचित्रण से समुद्री संसाधनों के सतत दोहन और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
  • पर्यावरण मानक: इसमें अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के MARPOL प्रदूषण मानकों का पालन किया गया है। 

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