Stealth Frigate Doonagiri
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना ने कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) से अपना पांचवां स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘दुनागिरी’ (Dunagiri) प्राप्त किया है। यह ‘नीलगिरी श्रेणी’ (प्रोजेक्ट 17A) का पांचवां जहाज है।
दुनागिरी के बारे मे:
- नामकरण: नया जहाज ‘दुनागिरी’ पूर्ववर्ती INS दुनागिरी (लिएंडर-क्लास फ्रिगेट) का पुनर्जन्म है, जिसने 1977 से 2010 तक 33 वर्षों तक सेवा दी थी। इसका नाम उत्तराखंड की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है।
- प्रोजेक्ट 17A (P-17A): यह प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक श्रेणी) का आधुनिक उत्तराधिकारी है। इसके तहत कुल 7 जहाजों का निर्माण किया जा रहा है: 4 मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा और 3 GRSE द्वारा।
इसकी विशेषताएं:
- प्रकार: गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate)
- डिजाइन: वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा स्वदेशी डिजाइन
- विस्थापन: लगभग 6,670 टन
- लंबाई: 149 मीटर
- गति: 28-32 समुद्री मील (Knots)
- प्रणोदन (Propulsion): CODOG सिस्टम (डीजल इंजन और गैस टर्बाइन का मिश्रण)
- मारक मिसाइलें: ब्रह्मोस (BrahMos) सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और MRSAM (बराक-8) हवाई रक्षा प्रणाली।
- सेंसर: एडवांस्ड MF-STAR रडार, जो एक साथ कई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है।
- पनडुब्बी रोधी (ASW): स्वदेशी टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर (RBU-6000)।
- स्टील्थ फीचर: विशेष संरचनात्मक डिजाइन और रडार-अवशोषक कोटिंग, जो इसे दुश्मन के रडार से अदृश्य बनाने में मदद करती है।
महत्व:
- रणनीतिक मजबूती: यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की उपस्थिति को सशक्त बनाता है, जिससे समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी क्षमता में भारी वृद्धि होती है।
- उन्नत मारक क्षमता: ब्रह्मोस मिसाइल और आधुनिक रडार सिस्टम से लैस यह जहाज हवा, सतह और पानी के नीचे (पनडुब्बी रोधी) एक साथ युद्ध लड़ने में सक्षम है।
- स्वदेशी आत्मनिर्भरता: लगभग 75% स्वदेशी सामग्री के साथ, यह ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- आर्थिक विकास: इसके निर्माण में 200 से अधिक MSMEs शामिल रहे, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए।
