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ISRO द्वारा मिशन मित्र लॉन्च

Mission Mitra launched by ISRO

Mission Mitra launched by ISRO

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के तहत ‘मिशन मित्र’ (Mission MITRA) की शुरुआत की। 

मिशन मित्र क्या हैं?

मिशन मित्र (Mapping of Interoperable Traits and Reliability Assessment) इसरो और भारतीय वायु सेना के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (IAM) द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन किया गया एक एनालॉग स्पेस मिशन (Analogue Space Mission) है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष की प्रतिकूल परिस्थितियों में मानव व्यवहार और मनोवैज्ञानिक लचीलेपन का परीक्षण करना है। 

मिशन के मुख्य पहलू: 

  • स्थान और चयन: इस मिशन का संचालन लद्दाख (लेह) के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया जा रहा है।
    • लद्दाख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यहाँ का वातावरण—कम ऑक्सीजन (हाइपोक्सिया), जमा देने वाला तापमान और एकांत—अंतरिक्ष की जटिल परिस्थितियों के काफी समान है।
  • उद्देश्य:
    • मनोवैज्ञानिक अनुकूलन: यह देखना कि ‘गगनयात्री’ (अंतरिक्ष यात्री) तनाव और अलगाव की स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
    • इंटरऑपरेबिलिटी: चालक दल (Crew) और जमीनी नियंत्रण (Ground Control) के बीच प्रभावी संचार और निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण।
    • व्यवहारगत अध्ययन: लंबी अवधि के मिशनों के लिए टीम के भीतर सहयोग और भावनात्मक स्थिरता का आकलन।
  • व्योममित्र (Vyommitra) से संबंध:
    • ‘मिशन मित्र’ का नाम अक्सर इसरो के महिला रोबोटिक ह्युमनॉइड व्योममित्र के साथ जोड़कर देखा जाता है।
    • जहाँ ‘मिशन मित्र’ जीवित अंतरिक्ष यात्रियों के व्यवहारिक परीक्षण पर केंद्रित है, वहीं व्योममित्र को बिना चालक दल वाले गगनयान मिशनों (G1 और G2) में भेजा जाएगा ताकि वह अंतरिक्ष यान के मापदंडों की निगरानी कर सके और जीवन रक्षक प्रणालियों की जांच कर सके। 

गगनयान मिशन क्या है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम है, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में भेजकर उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाएगा।

  • उद्देश्य: इस मिशन के तहत 3 सदस्यों के दल को 400 किलोमीटर की कक्षा में 3 दिनों के लिए भेजा जाएगा। मिशन का समापन भारतीय समुद्री जल (अरब सागर) में सुरक्षित लैंडिंग के साथ होगा।
  • प्रक्षेपण यान: इसके लिए इसरो के सबसे भारी रॉकेट LVM3 का उपयोग किया जा रहा है, जिसे ‘ह्यूमन रेटेड’ (HLVM3) बनाने के लिए संशोधित किया गया है। इसमें सुरक्षा के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ (CES) जोड़ा गया है।
  • ऑर्बिटल मॉड्यूल: इसमें दो मुख्य भाग हैं—क्रू मॉड्यूल (CM), जहाँ अंतरिक्ष यात्री रहेंगे, और सर्विस मॉड्यूल (SM), जो प्रणोदन और शक्ति प्रदान करेगा।

मिशन की वर्तमान स्थिति:

  • मानवरहित मिशन G1: पहला मानवरहित परीक्षण मिशन (G1) मार्च 2026 के लिए निर्धारित है। इसमें व्योममित्र रोबोट को भेजा जाएगा।
  • मानवयुक्त मिशन (Crewed Flight): मुख्य मानव मिशन अब 2027 की पहली तिमाही में होने की संभावना है। देरी का मुख्य कारण सुरक्षा मानकों और जटिल तकनीकों का गहन परीक्षण है।
  • परीक्षणों की प्रगति: अब तक लगभग 8,000 से अधिक ज़मीनी परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं, जिनमें पैराशूट ड्रॉप टेस्ट और क्रू एस्केप सिस्टम का सफल परीक्षण (TV-D1) शामिल है।
  • अंतरिक्ष यात्रियों का चयन और प्रशिक्षण: चार भारतीय वायु सेना पायलटों—प्रशांत नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला—का चयन किया गया है। वे बेंगलुरु के अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में सघन प्रशिक्षण ले रहे हैं।
  • भविष्य की योजना: गगनयान की सफलता के बाद भारत 2028 तक अपने ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) का पहला मॉड्यूल लॉन्च करने और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने का लक्ष्य रखता है। गगनयान मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता रखने वाला दुनिया का चौथा देश बना देगा।

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