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NCERT को मिला मानद विश्वविद्यालय का दर्जा

NCERT gets deemed university status

NCERT gets deemed university status

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को ‘मानद विश्वविद्यालय’ (Deemed-to-be-University) का दर्जा प्रदान किया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सिफारिश पर लिया गया है।

  • NCERT को ‘डी-नोवो’ (De-Novo) श्रेणी के तहत यह दर्जा मिला है। इस श्रेणी में उन संस्थानों को रखा जाता है जो ज्ञान के विशिष्ट और उभरते क्षेत्रों (जैसे शिक्षण नवाचार और अनुसंधान) में उत्कृष्टता के लिए समर्पित होते हैं।

‘मानद विश्वविद्यालय’ का क्या अभिप्राय है?

भारत में ‘मानद विश्वविद्यालय’ (Deemed-to-be-University) एक विशेष शैक्षणिक दर्जा है, जो उन उच्च शिक्षण संस्थानों को दिया जाता है जो विश्वविद्यालय नहीं हैं, लेकिन शिक्षा के किसी विशिष्ट क्षेत्र में बहुत उच्च स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

  • UGC अधिनियम, 1956 की धारा 3: केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सलाह पर, किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान को ‘मानद विश्वविद्यालय’ घोषित कर सकती है।
  • संवैधानिक स्थिति: एक बार घोषित होने के बाद, इन संस्थानों को वे सभी अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त हो जाते हैं जो एक पूर्ण विश्वविद्यालय के पास होते हैं।
  • नामकरण: इन संस्थानों को अपने आधिकारिक नाम में “मानद विश्वविद्यालय” (Deemed-to-be University) शब्द का उपयोग करना अनिवार्य है।

मानद विश्वविद्यालय की प्रमुख विशेषताएं:

  • डिग्री प्रदान करना: ये संस्थान अपने स्वयं के नाम से स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और डॉक्टरेट (PhD) की डिग्री प्रदान कर सकते हैं।
  • पाठ्यक्रम निर्माण: इन्हें अपना स्वयं का सिलेबस और कोर्स डिजाइन करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है, जिससे ये उद्योग की आधुनिक जरूरतों के अनुसार बदलाव कर सकते हैं।
  • प्रवेश और शुल्क: ये अपनी प्रवेश प्रक्रिया (Admission Process) और शुल्क संरचना (Fee Structure) स्वयं निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • परीक्षा प्रणाली: अपनी स्वयं की मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली विकसित करने की शक्ति। 

पात्रता मानदंड (UGC नियमावली 2023 के अनुसार):

  • अकादमिक प्रदर्शन: संस्थान के पास कम से कम तीन निरंतर चक्रों के लिए NAAC ‘A’ ग्रेड (न्यूनतम 3.01 CGPA) होना चाहिए।
  • रैंकिंग: संस्थान NIRF रैंकिंग में विशिष्ट श्रेणी में शीर्ष 50 में या समग्र (Overall) रैंकिंग में शीर्ष 100 में लगातार तीन वर्षों तक रहा हो।
  • शिक्षक-छात्र अनुपात: न्यूनतम 1:20 का अनुपात होना अनिवार्य है।
  • संकाय और छात्र संख्या: कम से कम 150 पूर्णकालिक शिक्षक और 3,000 छात्र होने चाहिए।
  • बहुविषयक (Multi-disciplinary): संस्थान में कम से कम 5 स्नातकोत्तर विभाग होने चाहिए जो शोध कार्यों में संलग्न हों। 

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT):

  • यह भारत सरकार द्वारा 1961 में स्थापित एक स्वायत्त संस्थान है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। 
  • NCERT का प्राथमिक कार्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देना और सहायता प्रदान करना है। इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं: 
  • पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें: स्कूलों के लिए मानक पाठ्यक्रम (Syllabus) और पाठ्यपुस्तकें तैयार करना, जिनका उपयोग मुख्य रूप से CBSE और कई राज्य बोर्डों द्वारा किया जाता है।
  • अनुसंधान और नवाचार: शिक्षा के क्षेत्र में नए शोध को बढ़ावा देना और शिक्षण की उन्नत तकनीकों का विकास करना।
  • शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों के लिए सेवा-पूर्व और सेवा-कालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना। 

संगठनात्मक ढांचा: NCERT की कई महत्वपूर्ण संघटक इकाइयाँ हैं:

  • राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान (NIE), नई दिल्ली
  • केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET), नई दिल्ली
  • पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), भोपाल
  • क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIEs): ये अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग में स्थित हैं।

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