FAO Food Price Index
संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने खाद्य मूल्य सूचकांक के तहत मार्च महीने के लिए वैश्विक खाद्य कीमतों का डेटा जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते ऊर्जा लागत में वृद्धि के कारण खाद्य मूल्य सूचकांक में वृद्धि हुई है।
FAO खाद्य मूल्य सूचकांक 2026 की रिपोर्ट:
-
- सूचकांक में उछाल: FAO खाद्य मूल्य सूचकांक मार्च 2026 में औसतन 128.5 अंक पर पहुंच गया, जो फरवरी की तुलना में 2.4% अधिक है।
- वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि: मार्च 2025 की तुलना में, सूचकांक में 1.0% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- प्रमुख कारक (Near East Conflict): निकट पूर्व (Near East/Middle East) में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा लागत में वृद्धि इसका मुख्य कारण है।
- मूल्य वृद्धि के कारण:
- ऊर्जा लागत (Energy Costs): संघर्ष के कारण तेल और ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई है, जिससे परिवहन और कृषि आदानों (Fertilizer) की लागत बढ़ गई है।
- खाद्य तेल और चीनी: वनस्पति तेल सूचकांक में 5.1% की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि कच्चे तेल की उच्च कीमतों के कारण जैव ईंधन (Biofuel) की मांग बढ़ी है।
- चीनी की कीमतें: चीनी की कीमतों में 7.2% का उछाल आया है, क्योंकि ब्राजील में गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक होने की उम्मीद है।
- गेहूं: सूखा चिंताओं और उर्वरक की लागत बढ़ने के कारण गेहूं की कीमतों में 4.3% की वृद्धि हुई है।
प्रभाव:
- वैश्विक खाद्य सुरक्षा: हालांकि, FAO का कहना है कि अनाज की आपूर्ति अभी भी आरामदायक स्थिति में है, लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है, तो यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
- भारत पर प्रभाव: भारत के लिए, उच्च वैश्विक खाद्य कीमतें, विशेष रूप से खाद्य तेल और ऊर्जा, आयातित मुद्रास्फीति (Imported Inflation) को बढ़ा सकती हैं, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है।
- कृषि लागत (Input Costs): यदि संघर्ष 40 दिनों से अधिक चलता है, तो उर्वरक और ईंधन की ऊंची कीमतें किसानों को कम उत्पादन के लिए प्रेरित कर सकती हैं, जिससे भविष्य की फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
- नीतिगत प्रतिक्रिया: भारत सरकार को उर्वरक सब्सिडी और ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है।
|
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के बारे में:
|
