Shri Jagannath International Airport
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने श्री जगन्नाथ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए चरण-1 वन मंजूरी प्रदान की। इस मंजूरी के तहत पुरी वन प्रभाग के 27.886 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी कार्यों (हवाई अड्डा निर्माण) के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
श्री जगन्नाथ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना
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प्रकार: यह एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
- स्थान: यह हवाई अड्डा पुरी जिले के ब्रह्मगिरि तहसील के अंतर्गत सिपासरुबली (Sipasarubali) और संधापुर (Sandhapur) मौजा में स्थित होगा।
- क्षेत्रफल: यह विशाल परियोजना लगभग 1,164 एकड़ (471 हेक्टेयर) भूमि पर फैली होगी।
- लागत: परियोजना की अनुमानित लागत ₹5,631 करोड़ है।
- क्षमता: पहले चरण के पूरा होने पर, यह प्रति वर्ष 46 लाख यात्रियों (4.6 million per annum) को संभालने की क्षमता रखेगा।
- वर्तमान स्थिति: लगभग 1,164 एकड़ में से 961 एकड़ से अधिक भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है। शेष निजी भूमि (लगभग 221 एकड़) के लिए सार्वजनिक सुनवाई और मुआवजे की प्रक्रिया चल रही है।
- निवेश: अडानी समूह, GMR समूह और फेयरफैक्स (Fairfax) जैसे प्रमुख वैश्विक बुनियादी ढांचा विकासकों ने इस परियोजना में रुचि दिखाई है।
परियोजना का महत्व:
- वैश्विक पर्यटन केंद्र: पुरी ‘चार धाम’ में से एक है। सीधा अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क दुनिया भर के जगन्नाथ भक्तों और विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा को सुलभ बनाकर इसे एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
- आर्थिक संवर्धन: हवाई अड्डे के निर्माण से होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प (जैसे पट्टचित्र और पिपली कार्य) क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- बुनियादी ढांचे का विकास: भुवनेश्वर और पुरी के बीच प्रस्तावित ‘हाई-स्पीड कॉरिडोर’ और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से तटीय ओडिशा के समग्र बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
- लॉजिस्टिक्स और निवेश: बेहतर कनेक्टिविटी से राज्य में निवेश बढ़ेगा और समुद्री उत्पादों (Sea Food) के निर्यात के लिए एक नया लॉजिस्टिक हब विकसित होगा।
- क्षेत्रीय संतुलन: यह ओडिशा का दूसरा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा, जो बीजू पटनायक हवाई अड्डे (भुवनेश्वर) के भार को कम करेगा और आपातकालीन स्थिति में वैकल्पिक लैंडिंग साइट प्रदान करेगा।
सामाजिक-पारिस्थितिक चुनौतियां:
- तटीय पारिस्थितिकी तंत्र: प्रस्तावित स्थल चिल्का झील के करीब है। निर्माण से पक्षियों के प्रवास मार्ग और स्थानीय जैव विविधता (विशेषकर दुर्लभ कछुओं और डॉल्फिन) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
- पेड़ों की कटाई: अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना के लिए लगभग 13,000 पेड़ों को काटा जाना है, जो चक्रवात प्रवण इस क्षेत्र में प्राकृतिक ‘बायो-शील्ड’ का काम करते हैं।
- तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ) उल्लंघन: रनवे का एक हिस्सा समुद्र के बहुत करीब होने के कारण CRZ मानदंडों के सख्त अनुपालन की चुनौती है, जिससे भविष्य में कटाव (Erosion) का खतरा बढ़ सकता है।
- भूमि विस्थापन: सिपासरुबली और संधापुर क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों और किसानों के पुनर्वास और उनकी आजीविका के नुकसान को लेकर सामाजिक असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
- ध्वनि और वायु प्रदूषण: पवित्र शहर की शांत और आध्यात्मिक क्षेत्र पर हवाई यातायात से होने वाले शोर और कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है।
