(India-Egypt Joint Special Forces Exercise Cyclone-IV) भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास साइक्लोन-IV

संदर्भ:
भारत और मिस्र के बीच संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘साइक्लोन-IV’ का आयोजन 09 से 17 अप्रैल 2026 तक मिस्र के अंशास (Anshas) में किया जा रहा है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
साइक्लोन-IV अभ्यास का मुख्य विवरण:
-
- संस्करण: यह ‘साइक्लोन’ श्रृंखला का चौथा संस्करण है।
- स्थान: रेंजर्स फोर्सेज मुख्यालय, अंशास, मिस्र।
- अवधि: 09 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026।
- प्रतिभागी:
- भारतीय दल: विशेष बलों (Special Forces) के 25 जवान।
- मिस्र का दल: मिस्र के विशिष्ट विशेष बल (Elite Special Forces)।
- उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत मरुस्थलीय और अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में विशेष अभियानों के लिए अंतर-संचालन क्षमता (Interoperability) और संयुक्त मिशन योजना कौशल को बढ़ाना।
- पृष्ठिभूमि: यह अभ्यास वार्षिक आधार पर भारत और मिस्र में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।
-
- साइक्लोन-I (2023): जैसलमेर, राजस्थान (भारत) में आयोजित पहला संस्करण।
- साइक्लोन-II (2024): अंशास, मिस्र में आयोजित।
- साइक्लोन-III (फरवरी 2025): महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान (भारत) में संपन्न हुआ।
प्रमुख प्रशिक्षण गतिविधियाँ:
- विशेष परिचालन रणनीति (Tactics): दोनों पक्ष मरुस्थलीय और शहरी इलाकों में विशेष अभियानों के संचालन के लिए अपनी तकनीकों और प्रक्रियाओं (TTPs) को साझा कर रहे हैं।
- आतंकवाद विरोधी अभियान: इसमें आतंकी ठिकानों पर छापेमारी, घेरा और तलाशी अभियान (Cordon and Search) और बंधक बचाव (Hostage Rescue) जैसे जटिल परिदृश्यों का अभ्यास शामिल है।
- उन्नत कौशल: स्नाइपिंग, कॉम्बेट फ्री-फॉल, आईईडी (IED) और काउंटर-आईईडी प्रशिक्षण, तथा युद्धकालीन प्राथमिक चिकित्सा (Combat First Aid) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- तकनीकी विनिमय: भारतीय दल स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन भी कर रहा है, जो भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा निर्यात क्षमता को दर्शाता है।
रणनीतिक महत्व:
- रक्षा कूटनीति: मिस्र अफ्रीका और पश्चिम एशिया में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है। यह अभ्यास भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति का एक अहम हिस्सा है।
- साझा सुरक्षा चिंताएं: दोनों देश आतंकवाद, उग्रवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। संयुक्त प्रशिक्षण से इन खतरों के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित होती है।
- द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता: वर्ष 2023 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाया है, जिसमें सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग प्राथमिकता पर हैं।