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RBI उत्कर्ष 2029 फ्रेमवर्क

RBI उत्कर्ष 2029 फ्रेमवर्क | RBI Utkarsh 2029 Framework

RBI Utkarsh 2029 Framework

संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मध्यम अवधि की रणनीति रूपरेखा, ‘उत्कर्ष 2029’ (Utkarsh 2029) लॉन्च की है। यह रणनीति अप्रैल 2026 से मार्च 2029 तक की अवधि को कवर करती है। इसका मुख्य उद्देश्य RBI को एक ‘विश्व स्तरीय पूर्ण-सेवा केंद्रीय बैंक’ के रूप में स्थापित करना और उभरती आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार रहना है। 

उत्कर्ष 2029 के 6 प्रमुख स्तंभ:

  • मजबूत विनियमन (Robust Regulation): नियमों को सरल बनाना और अनुपालन (compliance) बोझ को कम करना ताकि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिल सके।
  • ग्राहक केंद्रित और समावेशी वित्त (Customer Centricity & Inclusive Finance): ग्राहक सेवा मानकों में सुधार और यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) के माध्यम से ऋण तक पहुंच बढ़ाना।
  • प्रतिस्पर्धी वित्तीय बाजार (Competitive Financial Markets): सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में पारदर्शिता बढ़ाना और खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • प्रभावी प्रौद्योगिकी (Effective Technology): AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और एसेट टोकनाइजेशन जैसी तकनीकों का लाभ उठाना।
  • भविष्य के लिए तैयार संगठन (Future-Ready Organisation): कर्मचारियों का कौशल विकास (upskilling) और जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को नीतियों में शामिल करना।
  • ग्लोबल इंडिया (Global India): भारतीय रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण और UPI के वैश्विक विस्तार को गति देना। 

प्रमुख पहल और तकनीकी नवाचार:

  • प्रोजेक्ट सा-मुद्रा (Project Sa-Mudra): इसका उद्देश्य मुद्रा प्रबंधन (currency management) प्रणाली का आधुनिकीकरण करना है।
  • स्वदेशी AI और LLM: RBI अपनी आंतरिक गतिविधियों और पर्यवेक्षण (supervision) के लिए अपना स्वयं का ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (LLM) विकसित करेगा।
  • e-Kuber 3.0: अगली पीढ़ी के इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंकिंग परिचालन को और बेहतर बनाया जाएगा।
  • CBDC विस्तार: सीमा पार भुगतान (cross-border payments) को सस्ता और तेज बनाने के लिए ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी’ का दायरा बढ़ाया जाएगा। 

महत्व:

  • आर्थिक स्थिरता: यह ढांचा वित्तीय प्रणाली में ‘कंटेजियन रिस्क’ (छूत का जोखिम) के आकलन को मजबूत करता है।
  • वित्तीय समावेशन: ULI और डिजिटल पहलों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना जीएस-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटल संप्रभुता: वैश्विक भुगतान प्रणालियों में भारत की भूमिका को मजबूत करना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अहम है।

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