सियाचिन दिवस | Siachen day

संदर्भ:
प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल को भारतीय सेना द्वारा सियाचिन दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1984 में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की सफलता और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में तिरंगा फहराने वाले वीर सैनिकों के साहस को समर्पित है।
ऑपरेशन मेघदूत के बारे में:
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- परिचय: ऑपरेशन मेघदूत 13 अप्रैल 1984 को भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए शुरू किया गया एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- अस्पष्ट सीमांकन: 1949 के कराची समझौते और 1972 के शिमला समझौते में सीमा रेखा को केवल बिंदु NJ9842 तक ही स्पष्ट किया गया था, जिसके आगे के क्षेत्र को “उत्तर से ग्लेशियरों तक” कहकर छोड़ दिया गया।
- पाकिस्तानी चाल: 1970 और 80 के दशक में पाकिस्तान ने विदेशी पर्वतारोहियों को परमिट देकर और अमेरिकी नक्शों में इस क्षेत्र को अपना दिखाकर “मानचित्र आक्रामकता” शुरू की।
- खुफिया जानकारी: भारत को सूचना मिली कि पाकिस्तान ‘ऑपरेशन अबाबील’ के तहत 17 अप्रैल 1984 को सियाचिन पर कब्जा करने वाला है।
ऑपरेशन का निष्पादन:
- नेतृत्व: इस मिशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पी.एन. हून ने किया, जबकि कर्नल नरेंद्र ‘बुल’ कुमार की शुरुआती टोह (Reconnaissance) ने इसकी नींव रखी।
- दिनांक का चयन: भारतीय सेना ने 13 अप्रैल 1984 (बैसाखी का दिन) को हमले के लिए चुना ताकि पाकिस्तान को चौंकाया जा सके।
- वायुसेना की भूमिका: IAF के विमानों (IL-76, An-12) और हेलीकॉप्टरों (चीता, चेतक) ने अत्यधिक ऊंचाई पर रसद और सैनिकों को एयरलिफ्ट किया।
प्रमुख सफलताएं:
- नियंत्रण: भारत ने 70 किमी लंबे ग्लेशियर और साल्टोरो रिज के प्रमुख दर्रों— सिया ला, बिलाफोंड ला, और ग्योंग ला पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
- कीर्तिमान: भारतीय सेना दुनिया की एकमात्र सेना बनी जिसने 20,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारी तोपें और टैंक तैनात किए।
सियाचिन ग्लेशियर के बारे में:
- अवस्थिति: यह पूर्वी काराकोरम पर्वतमाला (Ladakh) में स्थित है। यह उत्तर-पश्चिम में इंदिरा कोल (Indira Col) से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व में नुब्रा घाटी (Nubra Valley) तक फैला है।
- लंबाई व ऊंचाई: लगभग 76 किमी की लंबाई के साथ यह काराकोरम का सबसे लंबा और ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर दुनिया का दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर है। इसकी ऊंचाई 12,000 फीट से अधिक है।
- नदी का स्रोत: सियाचिन ग्लेशियर नुब्रा नदी का मुख्य स्रोत है, जो श्योक और अंततः सिंधु नदी की सहायक नदी है।
- नाम का अर्थ: बाल्टी भाषा में ‘सिया’ का अर्थ ‘जंगली गुलाब’ और ‘चेन’ का अर्थ ‘स्थान’ होता है, अर्थात “जंगली गुलाबों की जगह”।
- त्रिकोणीय जंक्शन (Strategic Wedge): सियाचिन भारत के लिए एक बफर जोन है जो पाकिस्तान (PoK) और चीन (अक्साई चिन/Xinjiang) के बीच सीधा जमीनी संपर्क रोकता है।
- ऊंचाई का लाभ: भारत साल्टोरो रिज (Saltoro Ridge) की ऊंची चोटियों पर काबिज है, जिससे वह पाकिस्तान की गतिविधियों और शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर नजर रख सकता है।
- दो-मोर्चों पर युद्ध का खतरा: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की निकटता और दोनों देशों के बढ़ते सैन्य सहयोग के कारण भारत के लिए इस पर नियंत्रण बनाए रखना अनिवार्य है।
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- जलवायु: सर्दियों में तापमान -50°C तक गिर जाता है। यहाँ दुश्मन के गोलियों से ज्यादा मौतें हिमस्खलन (Avalanches), शीतदंश (Frostbite) और कम ऑक्सीजन (Hypoxia) के कारण होती हैं।
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वर्तमान स्थिति: वर्तमान में भारत पूरे ग्लेशियर और साल्टोरो की सभी मुख्य चोटियों पर प्रभावी नियंत्रण रखता है। भारत का स्पष्ट स्टैंड है कि विसैन्यीकरण (Demilitarization) तभी संभव है जब पाकिस्तान AGPL को आधिकारिक रूप से स्वीकार और प्रमाणित करे।
- वर्तमान में दोनों सेनाएं जिस 110 किमी लंबी रेखा पर तैनात हैं, उसे AGPL (Actual Ground Position Line) कहा जाता है।
- हाल ही में सियाचिन की अग्रिम चौकियों पर 5G नेटवर्क और VSAT तकनीक स्थापित की गई है। ‘प्रचंड’ (LCH) जैसे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की तैनाती से यहाँ की रक्षा क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।