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संसद का विशेष सत्र

संसद का विशेष सत्र | Special session of parliament

Special session of parliament

संदर्भ:

संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र का प्राथमिक उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण अधिनियम) के कार्यान्वयन को गति देना और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक मार्ग प्रशस्त करना है। 

सरकार द्वारा इस सत्र में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए गए हैं:

  • संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026: यह मुख्य विधेयक है जो महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संवैधानिक बदलाव प्रस्तावित करता है।
  • परिसीमन विधेयक, 2026 (Delimitation Bill, 2026): यह सीटों के पुनर्संयोजन और क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से परिभाषित करने से संबंधित है।
  • संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026: यह केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे दिल्ली और जम्मू-कश्मीर) के कानूनों में आरक्षण और सीटों के समायोजन हेतु आवश्यक संशोधन प्रस्तावित करता है। 

संसद के विशेष सत्र संबंधी जानकारी:

  • परिचय: भारतीय संसदीय प्रणाली में संसद का विशेष सत्र (Special Session of Parliament) एक ऐसी अनूठी बैठक है, जो नियमित रूप से होने वाले तीन सत्रों—बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र—के अतिरिक्त बुलाई जाती है। 
    • सामान्यत: इसका अर्थ उन बैठकों से होता है जो किसी विशेष अवसर, मील के पत्थर या तात्कालिक राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बुलाई जाती हैं।
  • संवैधानिक स्थिति: भारतीय संविधान में “विशेष सत्र” शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। 
  • संसद के किसी भी सत्र को बुलाने की शक्ति अनुच्छेद 85(1) के तहत राष्ट्रपति में निहित है। राष्ट्रपति सरकार (कैबिनेट) की सलाह पर संसद को बुलाते हैं।
  • संविधान यह अनिवार्य करता है कि संसद के दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए। 
  • प्रक्रिया: संसद के सत्र का कैलेंडर तय नहीं है, लेकिन इसे बुलाने की एक निश्चित प्रक्रिया है: 
  • निर्णय: सत्र बुलाने का निर्णय संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) द्वारा लिया जाता है।
  • राष्ट्रपति की भूमिका: समिति के निर्णय के बाद राष्ट्रपति औपचारिक रूप से सांसदों को सत्र के लिए आमंत्रित (Summon) करते हैं।
  • विशेष नियम: विशेष सत्रों में अक्सर प्रश्नकाल (Question Hour), शून्यकाल (Zero Hour) या निजी सदस्यों के कार्यों को निलंबित कर दिया जाता है ताकि मुख्य एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। 

विशेष बैठक (Special Sitting) बनाम विशेष सत्र:

44वें संविधान संशोधन (1978) के माध्यम से यह प्रावधान जोड़ा गया कि यदि देश में आपातकाल (Emergency) लागू हो और संसद सत्र में न हो, तो लोकसभा के कम से कम 1/10 सदस्य राष्ट्रपति से ‘विशेष बैठक’ बुलाने का अनुरोध कर सकते हैं। इसका उद्देश्य आपातकाल की उद्घोषणा को रद्द करने पर विचार करना होता है। 

कुछ उदाहरण:

आजादी के बाद से अब तक कई बार विशेष सत्र आयोजित किए गए हैं, उनमें से कुछ महत्वपूर्ण विशेष सत्र:

अवसर

वर्ष

विवरण

स्वतंत्रता की पूर्व संध्या

1947

सत्ता के हस्तांतरण और आजादी का जश्न मनाने के लिए ऐतिहासिक आधी रात का सत्र।

युद्ध और संकट

1962

भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी आक्रमण पर चर्चा करने के लिए नेहरू सरकार द्वारा बुलाया गया सत्र।

स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती

1997

आजादी के 50 साल पूरे होने पर 6 दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया।

संवैधानिक मील के पत्थर

2015

डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 125वीं जयंती पर संविधान दिवस मनाने हेतु सत्र।

आर्थिक सुधार (GST)

2017

वस्तु एवं सेवा कर (GST) के ऐतिहासिक रोलआउट के लिए आधी रात का सत्र।

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