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जी-20 उपग्रह मिशन

 जी-20 उपग्रह मिशन | G-20 Satellite Mission

G-20 Satellite Mission

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन यह पुष्टि की गई कि वर्ष 2027 में जी-20 (G20) उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य मौसम की सटीक निगरानी और जलवायु परिवर्तन का गहराई से अध्ययन करना है।

जी-20 उपग्रह मिशन के बारे में:

जी-20 उपग्रह मिशन भारत द्वारा प्रस्तावित एक वैश्विक अंतरिक्ष पहल है। यह एक बहुउद्देश्यीय वैज्ञानिक उपग्रह है जिसका लक्ष्य जी-20 देशों के सहयोग से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण निगरानी और सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए रीयल-टाइम डेटा साझा करना है।

प्रमुख उद्देश्य:

  • जलवायु और पर्यावरण की निगरानी: वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन, ओजोन परत की स्थिति और तापमान वृद्धि का रीयल-टाइम डेटा एकत्र करना।
  • वायु प्रदूषण ट्रैकिंग: विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में एरोसोल और हानिकारक कणों (Pollutants) की निगरानी करना।
  • मौसम पूर्वानुमान: चक्रवात, बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं के लिए सटीक चेतावनी प्रणाली विकसित करना, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) में मदद मिल सके।

प्रक्षेपण विवरण:

  • प्रक्षेपण वर्ष: 2027 (प्रस्तावित)।
  • कक्षा (Orbit): इसे सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (Sun-synchronous Orbit) में स्थापित किए जाने की योजना है, जो लगभग 720 किमी की ऊंचाई पर स्थित होगी।
  • नेतृत्व: भारत इस परियोजना में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और इसरो अन्य जी-20 देशों से इसमें वैज्ञानिक पेलोड के माध्यम से योगदान देने का आह्वान कर चुका है। 

विशेषताएं:

  • EnSAC (वायुमंडलीय संरचना के लिए पर्यावरण सेंसर): गैसों के मिश्रण का अध्ययन करने हेतु।
  • HyMATHS: वायुमंडलीय तापमान और आर्द्रता मापने के लिए हाइपरस्पेक्ट्रल मिलीमीटर वेव साउंडर।
  • POLSAC: बादलों और एरोसोल के ध्रुवीकरण सेंसर।
  • SACFF: जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग (Forest Fires) की निगरानी के लिए विशेष सेंसर। 

महत्व:

  • ग्लोबल साउथ का समर्थन: भारत इस मिशन के माध्यम से उन विकासशील देशों को उपग्रह डेटा प्रदान करेगा जिनके पास अपनी अंतरिक्ष क्षमताएं नहीं हैं, जैसा कि पहले दक्षिण एशिया उपग्रह (SAARC Satellite) के माध्यम से किया गया था।
  • डेटा साझाकरण नीति: भारत ने ‘जी-20 ओपन सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप’ का प्रस्ताव दिया है, जिससे जलवायु संबंधी डेटा सभी सदस्य देशों के लिए सुलभ होगा।
  • आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक नेतृत्व: यह मिशन दर्शाता है कि भारत केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान का नेतृत्व करने में सक्षम है। यह मिशन भारत की ‘स्पेस डिप्लोमेसी’ का एक प्रमुख स्तंभ है।

इसरो की अन्य बड़ी योजनाएं (2027-2040): जी-20 उपग्रह के साथ-साथ इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने भविष्य के रोडमैप को भी स्पष्ट किया है:

  • गगनयान (2027): भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन।
  • समुद्रयान (Deep Ocean Mission): गहरे समुद्र की खोज के लिए 2.2 मीटर व्यास वाला टाइटेनियम पात्र विकसित किया जा रहा है।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2035): अंतरिक्ष में भारत का अपना अनुसंधान केंद्र।
  • चंद्रमा पर मानव (2040): चंद्रमा की सतह पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य।

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