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पंजाब बेअदबी संशोधन विधेयक 2026

पंजाब बेअदबी संशोधन विधेयक 2026 | Punjab Sacrilege Amendment Bill 2026

Punjab Sacrilege Amendment Bill 2026

संदर्भ:

हाल ही में पंजाब विधानसभा ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 या पंजाब बेअदबी (संशोधन) विधेयक 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी (Sacrilege) के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान करना है। 

विधेयक की मुख्य विशेषताएं:

  • कठोर दंड का प्रावधान: बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 7 से 20 वर्ष तक के कारावास और 2 लाख से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
  • आजीवन कारावास: यदि बेअदबी किसी ‘आपराधिक साजिश’ (Criminal Conspiracy) के तहत सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के इरादे से की गई है, तो सजा 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना 25 लाख रुपये तक हो सकता है।
  • अपराध की प्रकृति: इस कानून के तहत सभी अपराधों को संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-bailable) और गैर-शमन योग्य (Non-compoundable) बनाया गया है।
  • जांच का स्तर: मामलों की जांच उप पुलिस अधीक्षक (DSP) या सहायक आयुक्त (ACP) स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी।
  • SGPC की भूमिका: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के लिए ‘स्वरूपों’ का एक केंद्रीय डिजिटल और भौतिक रजिस्टर बनाए रखना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें प्रत्येक प्रति को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी।
  • शब्दावली में बदलाव: विधेयक में ‘बीर’ (Bir) शब्द के स्थान पर अधिक सम्मानजनक शब्द ‘स्वरूप’ (Saroop) का उपयोग किया गया है। 

संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां:

  • अनुच्छेद 254 और समवर्ती सूची (Concurrent List): आपराधिक कानून संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (प्रविष्टि 1) के अंतर्गत आता है।
    • यदि राज्य का कानून केंद्रीय कानून (जैसे भारतीय न्याय संहिता – BNS) के विपरीत है, तो अनुच्छेद 254(1) के तहत केंद्रीय कानून प्रभावी होता है। हालांकि, राज्यपाल की सहमति से राज्य में इसे लागू किया जा सकता है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि BNS की धारा 299 (पुरानी IPC 295A) में अधिकतम सजा केवल 3 वर्ष है, जबकि यह कानून आजीवन कारावास की बात करता है।
  • पिछला विधायी इतिहास: 2016 (SAD-BJP सरकार) और 2018 (कांग्रेस सरकार) में भी इसी तरह के विधेयक पारित किए गए थे, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिली क्योंकि केंद्र ने इसे ‘धर्मनिरपेक्ष ढांचे’ के विरुद्ध माना था।
    • वर्तमान सरकार का तर्क है कि चूंकि यह केवल राज्य अधिनियम (2008 एक्ट) में संशोधन है, इसलिए राष्ट्रपति की नहीं, केवल राज्यपाल की सहमति पर्याप्त है।
  • विधेयक का दायरा: वर्तमान संशोधन केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब पर केंद्रित है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य धार्मिक ग्रंथों (गीता, कुरान, बाइबिल) के लिए अलग से कानूनी राय ली जा रही है।

निष्कर्ष:

यह कानून पंजाब में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एक ‘निवारक’ (Deterrent) के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि ‘बेअदबी’ की परिभाषा का विस्तार (मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चुनौती पेश कर सकता है और इसके संभावित दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है।

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