प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III | Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana-III

संदर्भ:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III (PMGSY-III) को उसकी मूल समय-सीमा मार्च 2025 से बढ़ाकर मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कैबिनेट के मुख्य निर्णय:
- संशोधित बजट: योजना का कुल परिव्यय ₹80,250 करोड़ से बढ़ाकर ₹83,977 करोड़ कर दिया गया है।
- विस्तारित समय-सीमा: मैदानी क्षेत्रों की सड़कों और पुलों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों के लिए मार्च 2028 तक का समय दिया गया है।
- पहाड़ी क्षेत्रों में पुलों (Bridges) के निर्माण के लिए इसे मार्च 2029 तक बढ़ाया गया है।
- लंबित परियोजनाओं को गति: 31 मार्च, 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक शुरू न हुए कार्यों को अब टेंडर और निष्पादन के लिए लिया जा सकेगा।
- लॉन्ग स्पैन ब्रिज (LSB): 161 लंबे पुलों के निर्माण के लिए ₹961 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जो पहले से स्वीकृत सड़क संरेखण (Alignments) पर स्थित हैं।
PMGSY-III का स्वरूप:
- परिचय: PMGSY-III को 2019 में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य केंद्र नए संपर्क के बजाय मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण और समेकन (Consolidation) है।
- समेकन लक्ष्य: इसके तहत राज्यों में 1,25,000 किलोमीटर लंबी मौजूदा ‘थ्रू रूट्स’ (Through Routes) और ‘प्रमुख ग्रामीण संपर्कों’ (Major Rural Links) को अपग्रेड करने का लक्ष्य है।
- सामाजिक-आर्थिक एकीकरण: यह योजना गांवों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण केंद्रों से जोड़ने पर केंद्रित है:
- ग्रामीण कृषि बाजार (GrAMs): किसानों को अपनी उपज मंडियों तक तेजी से और कम लागत में पहुँचाने में मदद करना।
- उच्च माध्यमिक विद्यालय: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच और नामांकन दर में सुधार।
- अस्पताल: स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- फंडिंग पैटर्न: इसमें केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय साझाकरण 60:40 (सामान्य राज्यों के लिए) और 90:10 (उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए) के अनुपात में होता है।
योजना की प्रगति और नवाचार:
- उपलब्धि: दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, PMGSY-III के तहत स्वीकृत 1,22,393 किमी सड़क में से लगभग 83% (1,01,623 किमी) का निर्माण पूरा हो चुका है।
- निगरानी प्रणाली: पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए OMMAS (Online Management, Monitoring, and Accounting System) और e-MARG जैसे डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाता है।
- हरित तकनीक: सड़क निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक, फ्लाई ऐश और कोल्ड मिक्स जैसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- गुणवत्ता नियंत्रण: त्रि-स्तरीय (Three-tier) गुणवत्ता निगरानी प्रणाली—पीआईयू (PIU), राज्य गुणवत्ता मॉनिटर (SQM), और राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर (NQM)—सुनिश्चित करती है कि सड़कें टिकाऊ हों।