तुर्की का नया सोशल मीडिया कानून | Türkiyes new social media law

संदर्भ:
हाल ही में तुर्की की संसद ने एक ऐतिहासिक कानून पारित किया, जिसके तहत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है।
तुर्की का नया सोशल मीडिया कानून:
- आयु सीमा: 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और उपयोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध।
- अनिवार्य आयु सत्यापन: YouTube, TikTok, Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त ‘एज-वेरिफिकेशन’ सिस्टम लागू करना होगा। उपयोगकर्ताओं को अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए सरकारी ई-सिस्टम का उपयोग करना पड़ सकता है।
- माता-पिता के लिए नियंत्रण: प्लेटफॉर्म्स को माता-पिता के लिए विशेष टूल्स (Parental Controls) प्रदान करने होंगे ताकि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख सकें।
- त्वरित कार्रवाई: यदि किसी प्लेटफॉर्म पर बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री पाई जाती है, तो कंपनियों को ‘आपातकालीन’ स्थिति में 1 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा।
- गेमिंग कंपनियों पर नियम: ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को भी तुर्की में स्थानीय प्रतिनिधि नियुक्त करना होगा और आयु-आधारित रेटिंग प्रणाली अपनानी होगी।
- जुर्माना और प्रतिबंध: नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर उनकी वैश्विक आय का 3% तक जुर्माना लगाया जा सकता है या उनकी इंटरनेट बैंडविड्थ में कटौती की जा सकती है।
महत्वपूर्ण आयाम:
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- वैश्विक डिजिटल प्रशासन: तुर्की ऐसा करने वाला अकेला देश नहीं है। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए इसी तरह का प्रतिबंध लगाया था। इंडोनेशिया और फ्रांस जैसे देश भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। यह दर्शाता है कि भविष्य में “डिजिटल संप्रभुता” और “बाल सुरक्षा” अंतरराष्ट्रीय कानून के केंद्र में होंगे।
- मौलिक अधिकार बनाम सुरक्षा (Privacy vs. Security):
- पक्ष: समर्थकों का तर्क है कि एल्गोरिदम-संचालित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और विकास के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। हाल ही में तुर्की के कहरामनमारस में हुई एक दुखद हिंसा की घटना के बाद इस मांग ने और जोर पकड़ा था।
- विपक्ष: आलोचकों और तुर्की की मुख्य विपक्षी पार्टी (CHP) का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है। आयु सत्यापन के लिए सरकारी पहचान का उपयोग करने से सरकारी निगरानी (Surveillance) बढ़ सकती है।
भारत के लिए प्रासंगिकता:
- भारत में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 में प्रावधान हैं, जहाँ बच्चों के डेटा प्रोसेसिंग के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है।