ड्रैगनफ्लाई की तीन नई प्रजातियों की खोज | Three new dragonfly species discovered

संदर्भ:
हाल ही में उत्तर-पूर्व भारत में वैज्ञानिकों ने दुर्लभ सरासाएस्ना की तीन नई ड्रैगनफ्लाई (व्याध पतंग) प्रजातियों की खोज की। शोधकर्ताओं की टीम ने ‘बोकहॉकर’ (Boghawker) समूह के तहत इन जीनस की इन दुर्लभ प्रजातियों का वर्णन किया है।
खोज की गई तीन नई प्रजातियां:
- क्लाउडेड बोकहॉकर (Sarasaeschna nuboides):
- स्थान: अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी।
- विशेषता: इसके पंखों पर बादलों जैसे धुंधले निशान (Clouded markings) होते हैं और यह उथले जंगली तालाबों के आसपास पाई जाती है।
- सियांग बोकहॉकर (Sarasaeschna sigotaayo):
- स्थान: अरुणाचल प्रदेश, सियांग घाटी।
- विशेषता: इसका नाम स्थानीय ‘आदि’ (Adi) भाषा के शब्द ‘सियांग’ (बड़ी नदी) पर रखा गया है। इसके वक्ष (Thorax) पर गहरी धारियां होती हैं।
- लॉन्ग-टेल्ड बोकहॉकर (Sarasaeschna dosdewaensis):
- स्थान: असम का करीमगंज जिला (दोसडेवा गाँव)।
- विशेषता: इसकी पूंछ जैसी संरचना (Cerci) लंबी होती है। इसे पहले एक अन्य प्रजाति ‘S. khasiana’ समझ लिया गया था, लेकिन विस्तृत विश्लेषण के बाद इसे नई प्रजाति घोषित किया गया। [1, 2, 5, 6, 7, 8, 9, 10]
महत्वपूर्ण तथ्य:
- अनुसंधान टीम: यह खोज NCBS (National Centre for Biological Sciences) बेंगलुरु के शांतनु जोशी और कृष्णमेघ कुंते के नेतृत्व में की गई, जिसमें स्थानीय प्रकृतिवादियों की भी भूमिका रही।
- जीनस सारसाएश्ना: यह एक दुर्लभ ओरिएंटल समूह है। इस खोज से पहले भारत में इस जीनस की केवल कुछ ही प्रजातियां ज्ञात थीं, जो अब बढ़कर 9 हो गई हैं।
- पारिस्थितिक संकेतक (Bioindicators): ड्रैगनफ्लाई ताजे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत देती हैं। इनकी उपस्थिति स्वच्छ और ऑक्सीजन युक्त पानी का प्रतीक है।
- खतरे: वनों की कटाई, जलविद्युत परियोजनाएं और जलवायु परिवर्तन इनके प्राकृतिक आवास (Shaded forest streams) के लिए प्रमुख खतरे हैं।]
संरक्षण का महत्व:
पूर्वोत्तर भारत ‘इंडो-बर्मा’ वैश्विक जैव-विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सियांग घाटी जैसी जगहों से पिछले 15 वर्षों में ड्रैगनफ्लाई की लगभग 10 नई प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि अभी भी कई प्रजातियों का दस्तावेजीकरण होना बाकी है।