अत्याधुनिक उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म | State-of-the-Art Advanced Armored Platform

संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की सैन्य शक्ति और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देते हुए महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में अत्याधुनिक बख्तरबंद लड़ाकू प्लेटफॉर्म (Advanced Armoured Platforms – AAP) का अनावरण किया है।
उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म क्या हैं?
अत्याधुनिक उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म (Advanced Armoured Platform – AAP) भारत द्वारा विकसित अगली पीढ़ी के लड़ाकू वाहन हैं। AAP एक स्वदेशी, बहुउद्देशीय और मॉड्यूलर बख्तरबंद लड़ाकू वाहन प्लेटफॉर्म है। यह ट्रैक्ड (टैंक जैसे बेल्ट वाले) और व्हील्ड (8×8 पहियों वाले) दोनों स्वरूपों में उपलब्ध है, जिसे भविष्य की युद्ध परिस्थितियों और परिचालन लचीलेपन के लिए डिजाइन किया गया है।
उद्देश्य:
-
आधुनिकीकरण: भारतीय सेना के पुराने पड़ रहे रूसी BMP-2 बेड़े को स्वदेशी तकनीक से बदलना।
-
परिचालन क्षमता: रेगिस्तान, ऊंचे पहाड़ों और जलीय क्षेत्रों जैसे कठिन भू-भागों में सेना की मारक क्षमता और आवाजाही को बढ़ाना।
-
आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम कर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना।
विकासकर्ता (Developers):
-
मुख्य डिजाइन: DRDO की प्रमुख प्रयोगशाला वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE)।
-
VRDE द्वारा विकसित इन प्लेटफॉर्म्स को विक्रम VT-21 (Vikram VT-21) नाम दिया गया है।
-
-
निर्माण भागीदार: इसका उत्पादन निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों Tata Advanced Systems (TASL) और Bharat Forge Limited (BFL) द्वारा कई MSMEs के सहयोग से किया गया है।
प्रमुख विशेषताएं:
-
क्रूलेस टरेट (Crewless Turret): इसमें 30mm की स्वदेशी तोप और 7.62mm PKT मशीन गन से लैस मानवरहित बुर्ज है, जिसे अंदर बैठे सैनिक रिमोटली संचालित करते हैं।
-
मारक क्षमता: यह प्लेटफॉर्म एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) दागने में सक्षम है।
-
सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय STANAG लेवल 4 और 5 के अनुरूप बैलिस्टिक और ब्लास्ट प्रोटेक्शन, जो भारी गोलाबारी और IED विस्फोटों से सुरक्षा प्रदान करता है।
-
एम्फीबियस (Amphibious): हाइड्रो-जेट तकनीक के कारण यह पानी में भी चलने में सक्षम है, जिससे नदियों को पार करना आसान होता है।
-
स्वदेशी सामग्री: वर्तमान में इसमें 65% स्वदेशी घटक हैं, जिसे भविष्य में 90% तक ले जाने का लक्ष्य है।
-
30mm क्रूलेस टरेट: दोनों प्लेटफॉर्म स्वदेशी 30mm मानवरहित टरेट से लैस हैं, जो रिमोट कंट्रोल से संचालित होते हैं। इसमें 7.62 mm PKT गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) लॉन्चर भी एकीकृत है।
-
उभयचर क्षमता: ये वाहन हाइड्रो-जेट्स से लैस हैं, जिससे ये नदियों और झीलों (जैसे पैंगोंग त्सो) को पार करने में सक्षम हैं। इनमें STANAG लेवल 4 और 5 की सुरक्षा दी गई है, जो इन्हें बैलिस्टिक हमलों और विस्फोटों (IED) से सुरक्षित रखती है।
महत्व:
- पर्वतीय युद्ध कौशल: जोरावर (Zorawar) जैसे लाइट टैंकों के साथ मिलकर ये प्लेटफॉर्म लद्दाख जैसी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चीन की चुनौतियों का जवाब देने में सक्षम होंगे।
- फ्यूचर इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) प्रोग्राम: यह अनावरण भारत के बहुप्रतीक्षित FICV कार्यक्रम को गति प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री को आधुनिक बनाना है।
-
बहुआयामी उपयोग: इसे इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल, कमांड पोस्ट, टोही वाहन या एम्बुलेंस जैसी विभिन्न भूमिकाओं के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।
-
वैश्विक प्रतिस्पर्धा: यह अमेरिकी स्ट्राइकर (Stryker) जैसे वाहनों को कड़ी टक्कर देता है, विशेषकर अपनी उभयचर क्षमता और उच्च सुरक्षा मानकों के कारण।
-
निर्यात क्षमता: उन्नत तकनीक और कम लागत के कारण यह अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करेगा।