हेरिटेज डिजाइनर कलेक्शन सोल थ्रेड्स | Heritage Designer Collection Soul Threads

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय कुटीर उद्योग निगम (Central Cottage Industries Corporation – CCIC) ने भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा विरासत को बढ़ावा देने के लिए अपना पहला हेरिटेज डिजाइनर संग्रह, ‘सोल थ्रेड्स’ (Soul Threads) लॉन्च किया।
सोल थ्रेड्स के बारे में:
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- परिचय: ‘सोल थ्रेड्स’ भारत का पहला ‘हेरिटेज डिज़ाइनर कलेक्शन’ है, जहाँ भारत की प्राचीन बुनाई परंपराओं और हस्तशिल्प को आधुनिक फैशन डिज़ाइन के साथ जोड़कर एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- उद्देश्य: लुप्त होती पारंपरिक बुनाई शैलियों और कलाकृतियों को आधुनिक रूप देकर जीवित रखना, स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों को सीधा बाज़ार और उचित मूल्य प्रदान करना।
- आयोजन और स्थान: यह विशेष प्रदर्शनी 24 अप्रैल से 10 मई 2026 तक जवाहर व्यापार भवन, जनपथ, नई दिल्ली में स्थित CCIC के प्रमुख शोरूम में आयोजित की जा रही है।
- संग्रह का दायरा: इसमें क्यूरेटेड साड़ियाँ, विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए परिधान (bespoke wear), हस्तनिर्मित आभूषण और होम फर्निशिंग शामिल हैं।
- आयोजक: केंद्रीय कुटीर उद्योग निगम (CCIC) जो वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के अधीन कार्य करता है।
- सहयोग: इस पहल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी’ (CoEK) जैसे संस्थानों का भी समर्थन प्राप्त है, जो डिज़ाइन विकास और नवाचार में मदद करते हैं।
- प्रमुख विषय (Themes): प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान फैशन शो को तीन मुख्य श्रेणियों में प्रस्तुत किया गया:
- अनेक (Anek): यह खादी साड़ियों की विविधता जैसे विभिन्न फाइबर, बनावट और तकनीकों को प्रदर्शित करता है।
- माटी (Maati): यह जोधपुर के ‘दाबू’ (Dabu) और गुजरात के ‘अजरख’ (Ajrakh) प्रिंट जैसे मिट्टी के सौंदर्यशास्त्र पर आधारित है।
- पुनः (Punah): यह स्थिरता (Sustainability) और अपसाइकिलिंग (Upcycling) पर केंद्रित है, जिसमें बचे हुए कपड़ों को नया जीवन दिया गया है।
महत्व:
- हस्तशिल्प और हथकरघा अर्थव्यवस्था: ‘सोल थ्रेड्स’ जैसे मंच कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक शिल्पकारों के लिए एक प्रतिष्ठित वाणिज्यिक अवसर प्रदान करते हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।
- सांस्कृतिक संरक्षण और नवाचार: यह पहल दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक ‘स्वदेशी’ ज्ञान को आधुनिक डिजाइन भाषा के साथ जोड़कर उसकी प्रासंगिकता को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ाया जा सकता है।
- वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया: यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का समर्थन करता है, जो स्थानीय शिल्प को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर केंद्रित है।
- सतत विकास (Sustainable Development): ‘पुनः’ जैसे विषयों के माध्यम से अपसाइकिलिंग को बढ़ावा देना पर्यावरण के अनुकूल फैशन और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में एक कदम है।