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पंचवर्षीय जैव विविधता प्रबंधन परियोजना

पंचवर्षीय जैव विविधता प्रबंधन परियोजना | Five-Year Biodiversity Management Project

Five-Year Biodiversity Management Project

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक पंचवर्षीय परियोजना (2025-2030) शुरू की।

पंचवर्षीय जैव विविधता प्रबंधन परियोजना क्या हैं?

यह एक बहु-हितधारक विकेंद्रीकृत संरक्षण परियोजना है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाकर जैव विविधता का संरक्षण करना है। 

  • यह परियोजना ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर आधारित है, जहाँ संरक्षण के निर्णय वन विभाग के बजाय ग्राम स्तर की ‘जैव विविधता प्रबंधन समितियों’ (BMCs) द्वारा लिए जाते हैं।
  • नोडल मंत्रालय: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार।
  • प्रशासक: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)।
  • सहयोगी साझेदार: वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)।
  • राज्य स्तर: तमिलनाडु और मेघालय के राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs)।

मुख्य उद्देश्य:

  • मुख्यधारा में लाना (Mainstreaming): जैव विविधता संरक्षण को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) का अनिवार्य हिस्सा बनाना।
  • क्षमता निर्माण: स्थानीय निकायों (BMCs) को तकनीकी और कानूनी रूप से प्रशिक्षित करना ताकि वे अपने संसाधनों का प्रबंधन कर सकें।
  • एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS): जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभ का उचित हिस्सा स्थानीय समुदायों तक पहुँचाना।
  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: स्वदेशी समुदायों के सदियों पुराने ज्ञान को ‘पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर’ (PBR) के माध्यम से प्रलेखित करना।
  • पारिस्थितिक तंत्र की बहाली: वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) को सुरक्षित करना और नष्ट हो चुके वन क्षेत्रों को फिर से पुनर्जीवित करना।

परियोजना के मुख्य घटक:

  • संस्थागत मजबूती: तमिलनाडु के पंचायतों और मेघालय की ग्राम रोजगार परिषदों (VECs) को वित्त और निर्णय लेने की शक्ति देना।
  • डिजिटल प्रलेखन: पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) को डिजिटल बनाना ताकि संसाधनों की चोरी (Biopiracy) रोकी जा सके।
  • सतत आजीविका: वन-आधारित उत्पादों (जैसे शहद, औषधीय पौधे) के लिए मूल्य श्रृंखला (Value Chain) विकसित करना।
  • निगरानी तंत्र: उपग्रह डेटा और जीआईएस (GIS) मैपिंग का उपयोग करके जैव विविधता में हो रहे बदलावों की रियल-टाइम ट्रैकिंग।

प्रमुख विशेषताएं:

  • भू-दृश्य आधारित दृष्टिकोण (Landscape Approach): यह प्रशासनिक सीमाओं के बजाय पारिस्थितिक सीमाओं (जैसे पूरा सत्यमंगलम या गारो हिल्स क्षेत्र) पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • अत्यधिक वित्तपोषण: लगभग 4.88 मिलियन डॉलर का समर्पित बजट, जो विशेष रूप से सामुदायिक स्तर के हस्तक्षेपों के लिए है।
  • समावेशी शासन: इसमें महिलाओं, जनजातीय समूहों और भूमिहीन श्रमिकों की भागीदारी को अनिवार्य बनाया गया है।
  • वैश्विक लक्ष्यों का स्थानीयकरण: यह भारत के 30×30 लक्ष्य (2030 तक 30% भूमि का संरक्षण) को प्राप्त करने का प्राथमिक साधन है।

महत्व:

  • रणनीतिक: यह भारत की अद्यतन ‘राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना’ (NBSAP) के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करती है।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा: सत्यमंगलम और गारो हिल्स जैसे क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: ‘ग्रीन माइक्रो-इंटरप्राइजेज’ के माध्यम से स्थानीय लोगों को वनों को काटे बिना आय अर्जित करने के साधन मिलेंगे।
  • जलवायु लचीलापन: जैव विविधता के संरक्षण से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे सूखा या अत्यधिक वर्षा) को झेलने के लिए अधिक सक्षम होगा

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