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डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली

डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली | Digital Grievance Redressal System

Digital Grievance Redressal System

संदर्भ:

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भारत की पहली डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली (Digital Grievance Redressal System) का उद्घाटन किया। यह पहल मुख्य रूप से कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025 (Karnataka Act No. 72 of 2025) के कानूनी ढांचे पर आधारित है। 

डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:

यह प्रणाली इंटीग्रेटेड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IPGRS) पोर्टल, जिसे ‘जनस्पंदना’ (Janaspandana) के नाम से भी जाना जाता है, के माध्यम से संचालित होती है।

  • केंद्रीकृत पोर्टल: गिग वर्कर भुगतान (Payout), काम की स्थिति (Working conditions), और एग्रीगेटर्स के साथ विवादों से संबंधित शिकायतें सीधे पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं।
  • स्वचालित रूटिंग: शिकायत दर्ज होने पर प्रणाली उसे संबंधित एग्रीगेटर (जैसे Swiggy, Zomato, Uber) की आंतरिक विवाद समाधान समिति (IDRC) को स्वचालित रूप से भेज देती है।
  • समयबद्ध समाधान: IDRC के लिए शिकायतों का समाधान करने की समय सीमा 14 दिन निर्धारित की गई है। यदि इस अवधि में समाधान नहीं होता, तो शिकायत स्वचालित रूप से गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड के पास चली जाती है।
  • ट्रैकिंग और पारदर्शिता: श्रमिक अपनी शिकायत की स्थिति को रीयल-टाइम में ट्रैक कर सकते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनती है।

कानूनी और संस्थागत ढांचा:

क) कर्नाटक गिग वर्कर्स एक्ट, 2025: यह अधिनियम 30 मई 2025 से प्रभावी माना गया है। यह राजस्थान के बाद गिग वर्कर्स को सुरक्षा देने वाला दूसरा राज्य कानून है, लेकिन ‘डिजिटल निवारण’ में यह अग्रणी है।

ख) एग्रीगेटर्स की बाध्यताएं:

  • प्रत्येक एग्रीगेटर को एक आंतरिक विवाद समाधान समिति (IDRC) गठित करनी होगी जिसमें प्रबंधन और श्रमिकों का समान प्रतिनिधित्व हो।
  • एग्रीगेटर्स को अनुबंध (Contract) में पारदर्शिता बरतनी होगी और किसी भी सेवा समाप्ति (Termination) से पहले 14 दिन का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
  • एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी ताकि श्रमिकों को पता चले कि उनकी रेटिंग और काम का आवंटन कैसे हो रहा है। 

ग) कल्याण निधि (Welfare Fund) और उपकर (Cess):

  • सरकार ने एक कर्नाटक गिग वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी एंड Welfare Fund की स्थापना की है।
  • इस निधि के लिए एग्रीगेटर्स को प्रति लेनदेन (Per transaction) 1% से 5% के बीच ‘कल्याण शुल्क’ (Welfare Fee) देना होगा।

महत्व:

  • श्रमिक अधिकारों का औपचारिकरण: गिग इकोनॉमी में काम करने वाले श्रमिकों को अब तक ‘स्वतंत्र ठेकेदार’ माना जाता था, जिससे वे कानूनी सुरक्षा से वंचित थे। यह कानून उन्हें विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID Number) देकर औपचारिक पहचान प्रदान करता है।
  • ई-गवर्नेंस का उदाहरण: IPGRS पोर्टल का उपयोग ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत को पुष्ट करता है।
  • डिजिटल श्रम विनियमन: यह कानून ‘एल्गोरिद्मिक प्रबंधन’  के कारण होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए प्रावधान करता है, जो आधुनिक श्रम अर्थशास्त्र (Labour Economics) में एक नई चुनौती है।

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