भारत का पहला मोती पालन क्लस्टर

संदर्भ:
हाल ही में झारखंड का हजारीबाग जिला भारत का पहला ऐसा केंद्र बन गया है जिसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मोती पालन क्लस्टर (Pearl Farming Cluster) के रूप में अधिसूचित किया गया है।
हजारीबाग मोती पालन क्लस्टर के बारे में:
- मान्यता: भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने 30 अगस्त 2024 को हजारीबाग को देश के पहले मोती क्लस्टर के रूप में मान्यता दी। इस परियोजना में लगभग ₹22 करोड़ का निवेश किया गया है।
- उद्देश्य: जल संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार सृजन, और मोती उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
- प्रौद्योगिकी: यहाँ मुख्य रूप से मीठे पानी के सीप (Freshwater Mussels) का उपयोग किया जाता है। इसमें वियतनामी प्रजाति Hyriopsis cumingii के संवर्धन के लिए ‘ब्रूड बैंक’ (Brood Bank) स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
- उत्पादन क्षमता: राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के अनुसार, हजारीबाग जिले से अकेले 1.02 लाख से अधिक मोतियों का उत्पादन दर्ज किया गया है।
महत्व:
- ग्रामीण उद्यमिता और कौशल विकास: हजारीबाग अब मोती पालन के लिए प्रशिक्षण और तकनीक का केंद्र बन गया है। रांची स्थित पुर्ती एग्रोटेक ट्रेनिंग सेंटर जैसे संस्थान किसानों को ग्राफ्टिंग और मोती संवर्धन की बारीकियां सिखा रहे हैं। यहाँ तक कि सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची जैसे शैक्षणिक संस्थानों ने इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए हैं।
- महिला सशक्तिकरण: इस क्लस्टर में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाओं को मोती पालन से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया जा रहा है।
- मूल्य संवर्धन: सरकार का ध्यान केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फरवरी 2025 में हजारीबाग में “मोती क्लस्टर में मूल्य संवर्धन” पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मोतियों की प्रोसेसिंग, डिजाइनिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे लिंक सुनिश्चित करना है।
- उच्च रिटर्न और कम निवेश: पारंपरिक खेती की तुलना में मोती पालन एक लाभदायक विकल्प है। लगभग ₹25,000 के शुरुआती निवेश से किसान भविष्य में लाखों की कमाई कर सकते हैं। एक मोती की कीमत गुणवत्ता के आधार पर ₹100 से लेकर ₹1,000 से अधिक तक हो सकती है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
उपलब्धियां:
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