हंता वायरस

संदर्भ:
मई 2026 में, अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे लग्जरी एक्सपेडिशन क्रूज शिप MV Hondius पर जानलेवा हंता वायरस (Hantavirus) के प्रकोप ने वैश्विक स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हंता वायरस क्या हैं?
हंता वायरस (Hantavirus) एक गंभीर ज़ूनोटिक रोग है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों (Rodents) के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है।
- यह वायरस Hantaviridae परिवार से संबंधित है और एक ‘एनवेलोप्ड’ RNA वायरस है।
- अन्य वायरल रोगों के विपरीत, इसके प्रसार के लिए किसी मच्छर या कीट की आवश्यकता नहीं होती है। इसके प्रमुख प्रकारों में ‘सिन नोम्ब्रे’ और ‘एंडीज वायरस’ शामिल हैं।
संचरण के प्रमुख मार्ग:
- एरोसोलाइजेशन (Aerosolization): यह सबसे मुख्य मार्ग है। जब संक्रमित चूहों का सूखा मल, मूत्र या लार हवा में सूक्ष्म कणों के रूप में मिल जाते हैं, तो सांस के जरिए ये मनुष्यों के श्वसन तंत्र में प्रवेश करते हैं।
- प्रत्यक्ष संपर्क: संक्रमित सतहों को छूने या दुर्लभ मामलों में चूहों के काटने से।
- मानव-से-मानव संचरण: सामान्यतः यह अत्यंत दुर्लभ है। हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एंडीज (Andes) वेरिएंट में बहुत करीबी संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की क्षमता देखी गई है।
नैदानिक सिंड्रोम और लक्षण:
हंता वायरस मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियाँ पैदा करता है:
- हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS): यह मुख्य रूप से अमेरिका महाद्वीप में पाया जाता है।
- शुरुआती लक्षण: बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द (विशेषकर जांघों और पीठ में)।
- गंभीर अवस्था: 4-10 दिनों के बाद फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे तीव्र श्वसन संकट (Shortness of breath) और खांसी शुरू होती है। इसकी मृत्यु दर लगभग 38-40% है।
- हेमरैजिक बुखार के साथ रीनल सिंड्रोम (HFRS): यह यूरोप और एशिया में अधिक प्रचलित है।
- इसमें अचानक सिरदर्द, पीठ दर्द, पेट दर्द, मतली और दृष्टि धुंधली हो जाती है।
- गंभीर मामलों में यह गुर्दे (Kidney) की विफलता और शरीर के अंदर रक्तस्राव का कारण बन सकता है। इसकी मृत्यु दर 1% से 15% के बीच होती है। [10, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21]
इतिहास और वैश्विक प्रसार:
इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान हुई थी, जब ‘हंतन नदी’ (Hantan River) के पास हजारों सैनिक बीमार पड़े थे। 1993 में अमेरिका के ‘फोर कॉर्नर्स’ क्षेत्र में इसके श्वसन संबंधी प्रकोप ने आधुनिक चिकित्सा जगत को हिला दिया था। भारत में भी 2011 के दौरान कर्नाटक जैसे राज्यों में इसके इक्का-दुक्का मामले देखे गए हैं।
जोखिम समूह और बचाव:
- जोखिम क्षेत्र: पुराने गोदामों, ग्रामीण घरों, खलिहानों या ऐसी जगह जहाँ चूहों का जमावड़ा हो, वहां काम करने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में होते हैं।
- रोकथाम:
- घरों और कार्यस्थलों को चूहा-मुक्त रखना।
- सफाई करते समय धूल न उड़े, इसके लिए झाड़ू लगाने के बजाय ब्लीच युक्त पानी का छिड़काव करना चाहिए।
- सफाई के दौरान दस्ताने और मास्क (N95) का उपयोग अनिवार्य है।
उपचार की स्थिति:
वर्तमान में हंता वायरस के लिए कोई विशिष्ट एंटी-वायरल दवा या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है। प्रारंभिक पहचान होने पर गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में सपोर्टिव केयर जैसे ऑक्सीजन थेरेपी, वेंटिलेशन और गुर्दे की निगरानी के माध्यम से मरीज की जान बचाई जा सकती है।