भारत-जापान क्वांटम और स्वास्थ्य सहयोग

संदर्भ:
हाल ही में एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत और जापान ने क्वांटम तकनीक और स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों (MoC/LoI) का आदान-प्रदान किया। यह सहयोग दोनों देशों के बीच ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी’ को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 की जापान यात्रा के परिणामों पर आधारित है।
प्रमुख समझौतों का विवरण:
- क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी: भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जापान के कैबिनेट कार्यालय के बीच एक Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए।
- इस साझेदारी के तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, सुरक्षित संचार नेटवर्क (Secure Communication), क्वांटम सेंसिंग और आधुनिक सामग्री अनुसंधान (Materials Research) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जापान के क्वांटम इनोवेशन हब्स को भारतीय संस्थानों के साथ जोड़ने की योजना है।
- स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरण: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), DST और जापान एजेंसी फॉर मेडिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (AMED) के बीच एक Memorandum of Cooperation (MoC) का आदान-प्रदान हुआ।
- इसमें डिजिटल स्वास्थ्य, कैंसर स्क्रीनिंग, शुरुआती निदान (Early Diagnosis) और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के प्रबंधन पर संयुक्त अनुसंधान शामिल है।
- सप्लाई चेन लचीलापन: दोनों देशों ने चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखलाओं में निर्भरता कम करने और लचीली चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला (Resilient Medical Supply Chains) बनाने के लिए संयुक्त ढांचे पर चर्चा की।
- मानव संसाधन विकास: शोधकर्ताओं की गतिशीलता (Researcher Mobility) को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त नवाचार मंच और भारतीय शोधकर्ताओं के लिए जापान में औद्योगिक इंटर्नशिप कार्यक्रमों पर सहमति बनी।
रणनीतिक महत्व:
- नेचुरल सिनर्जी: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, जापान की उन्नत विनिर्माण और कंप्यूटिंग क्षमताओं के साथ भारत का विशाल कुशल कार्यबल एक ‘प्राकृतिक तालमेल’ बनाता है।
- राष्ट्रीय मिशनों के साथ एकीकरण: यह समझौता भारत के ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ (NQM) और साइबर-फिजिकल सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे अन्य गहरे तकनीकी (Deep-tech) मिशनों को गति देगा।
- भू-राजनीतिक संदर्भ: यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘क्वाड’ (QUAD) के भीतर क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पर साझेदारी को सुदृढ़ करता है।
- आर्थिक सुरक्षा: 1 अप्रैल 2026 को जापान के विदेश मंत्रालय द्वारा ‘जापान-भारत आर्थिक मामलों के प्रभाग’ की स्थापना और $75 बिलियन के मुद्रा स्वैप समझौते का नवीनीकरण इस तकनीकी साझेदारी को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।