मुद्रा प्रबंधन-गारंटी विनियम 2026

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अधिकृत व्यक्ति) विनियम, 2026 (Foreign Exchange Management (Authorised Persons) Regulations, 2026) जारी किए। ये विनियम 6 मई, 2026 से प्रभावी हो गए हैं।
- इनका मुख्य उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा सेवाओं के वितरण ढांचे को आधुनिक बनाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।
मुद्रा प्रबंधन-गारंटी विनियम 2026 के मुख्य बिंदु:
- श्रेणी:;आरबीआई ने विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने वाले अधिकृत व्यक्तियों (APs) को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है:
- AD श्रेणी-I (Authorised Dealer Category-I): मुख्य रूप से बैंक, जिन्हें सभी प्रकार के चालू और पूंजी खाता लेनदेन करने की अनुमति है।
- AD श्रेणी-II (Authorised Dealer Category-II): इसमें गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) और अनुभवी मुद्रा विनिमय (forex) संस्थाएं शामिल हैं। इन्हें निर्दिष्ट चालू खाता लेनदेन और ₹25 लाख तक के व्यापार लेनदेन की अनुमति है।
- AD श्रेणी-III (Authorised Dealer Category-III): वे संस्थाएं जो विदेशी मुद्रा से जुड़े नवीन (innovative) उत्पादों और सेवाओं की पेशकश करती हैं।
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लाइसेंसिंग और नवीनीकरण: लाइसेंस देने और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है:
- PRAVAAH पोर्टल: नए लाइसेंस या नवीनीकरण के लिए आवेदन अब विशेष रूप से आरबीआई के PRAVAAH पोर्टल के माध्यम से जमा किए जाएंगे।
- ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंड: प्रवर्तकों, निदेशकों और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों (KMPs) के लिए सख्त योग्यता और अखंडता मानक निर्धारित किए गए हैं। कम से कम 50% निदेशकों के पास वित्तीय सेवा उद्योग का अनुभव होना अनिवार्य है।
- ED/NOC आवश्यकता: यदि आवेदक या उसके प्रवर्तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं, तो उन्हें ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जमा करना होगा।
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‘प्रिंसिपल-एजेंट’ मॉडल और फॉरेक्स कॉरेस्पोंडेंट (FxC): आरबीआई ने विदेशी मुद्रा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है:
- Forex Correspondent (FxC) योजना: AD श्रेणी-I और II के बैंक/संस्थाएं अब ‘प्रिंसिपल-एजेंट’ मॉडल के तहत ‘फॉरेक्स कॉरेस्पोंडेंट’ नियुक्त कर सकते हैं।
- फ्रैंचाइजी मॉडल का अंत: मौजूदा फ्रैंचाइजी व्यवस्थाओं को अगले दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना होगा और उन्हें फॉरेक्स कॉरेस्पोंडेंट मॉडल में परिवर्तित होना होगा।
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परिचालन आवश्यकताएं: संचालन की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए नए वित्तीय मानक तय किए गए हैं:
- न्यूनतम नेटवर्थ: AD श्रेणी-I के लिए ₹20 करोड़ और श्रेणी-II के लिए ₹10 करोड़ की न्यूनतम सकारात्मक नेटवर्थ आवश्यक है।
- टर्नओवर लक्ष्य: श्रेणी-II संस्थाओं को संचालन के दो साल के भीतर कम से कम ₹50 करोड़ का वार्षिक विदेशी मुद्रा टर्नओवर प्राप्त करना होगा।
- FFMC लाइसेंस पर रोक: आरबीआई ने घोषणा की है कि वह अब ‘पूर्ण मुद्रा परिवर्तक’ (FFMC) के लिए नए नए लाइसेंस जारी नहीं करेगा।
महत्व:
- वित्तीय समावेशन: फॉरेक्स कॉरेस्पोंडेंट मॉडल के माध्यम से पर्यटन और आम जनता के लिए विदेशी मुद्रा सेवाओं की उपलब्धता दूर-दराज के इलाकों तक बढ़ेगी।
- नियामक सुदृढ़ीकरण: डिजिटल पोर्टल और सख्त ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंडों से मनी लॉन्ड्रिंग और अनधिकृत लेनदेन पर लगाम लगेगी।
- वैश्विक एकीकरण: ये नियम भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक वित्तीय प्रणाली के साथ अधिक कुशलता से जोड़ने में मदद करेंगे।