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पद्मा डोरी पहल

पद्मा डोरी पहल

Padma Dori Initiative

संदर्भ:

हाल ही में उत्तर पूर्वी हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (NEHHDC) ने आधिकारिक तौर पर ‘पद्मा डोरी’ का शुभारंभ किया।

पद्मा डोरी पहल के बारे में:

‘पद्मा डोरी’ एक क्रॉस-कल्चरल टेक्सटाइल (अंतर-सांस्कृतिक वस्त्र) ब्रांड और पहल है, जो पूर्वोत्तर भारत के ‘एरी सिल्क’ (Eri Silk) और मध्य प्रदेश की ‘चंदेरी बुनाई’ (Chanderi Weaving) के अनूठे संगम को प्रस्तुत करती है। यह दो अलग-अलग क्षेत्रों की शिल्पकलाओं को मिलाकर एक ‘ग्लोबल सस्टेनेबल लग्जरी’ वस्त्र श्रृंखला तैयार करने की एक सरकारी योजना है।

  • मंत्रालय: यह पहल उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: इसका संचालन उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (NEHHDC) द्वारा किया जा रहा है।
  • लॉन्च तिथि: इसे आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 को नई दिल्ली के ‘ट्रावनकोर हाउस’ में लॉन्च किया गया।

प्रमुख उद्देश्य:

  • एक भारत श्रेष्ठ भारत: प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक और कलात्मक संबंधों को मजबूत करना।
  • टिकाऊ वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र: एक ऐसा एकीकृत और टिकाऊ टेक्सटाइल इकोसिस्टम बनाना जो पर्यावरण के अनुकूल हो।
  • कारीगरों का सशक्तिकरण: बुनकरों की आय में 20-25% की वृद्धि का लक्ष्य रखते हुए उन्हें सीधे राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जोड़ना।
  • कौशल विनिमय: मास्टर बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के बीच तकनीकी ज्ञान और पारंपरिक डिजाइन प्रणालियों का आदान-प्रदान करना। 

मुख्य विशेषताएं:

  • अहिंसा रेशम (Eri Silk): इस पहल में ‘एरी सिल्क’ का उपयोग किया जाता है, जिसे ‘शांति रेशम’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसके उत्पादन में रेशम के कीड़ों को मारा नहीं जाता।
  • डबल-जीआई (Double-GI) फ्यूजन: यह भारत की दो प्रसिद्ध ‘भौगोलिक संकेत’ (GI) परंपराओं का मेल है—असम का एरी रेशम और मध्य प्रदेश की चंदेरी बुनाई।
  • प्राकृतिक प्रसंस्करण: वस्त्रों के निर्माण में पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक रंगाई तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  • आइसोथर्मल गुणवत्ता: एरी सिल्क की थर्मल विशेषताओं (सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा) के साथ चंदेरी की पारभासी और चमक का मेल इसे अद्वितीय बनाता है। 

रणनीतिक महत्व:

  • सांस्कृतिक एकता: यह पहल उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत के बीच ‘शिल्प अंतर’ (Craft Gap) को कम कर राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देती है।
  • पर्यावरण और नैतिकता: ‘अहिंसा सिल्क’ और प्राकृतिक रंगों का उपयोग इसे वैश्विक ‘एथिकल फैशन’ (Ethical Fashion) बाजार में एक प्रीमियम स्थान दिलाता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: यह ग्रामीण कारीगरों के लिए बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर उनके उत्पादों को एक ‘विज़नरी ब्रांड’ के रूप में स्थापित करती है।
  • सॉफ्ट पावर: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पारंपरिक शिल्प और सतत विकास की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है।

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