टिमोर ग्रीन पिजन

संदर्भ:
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, तिमोर ग्रीन पिजन अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रजाति कुछ ही वर्षों में विलुप्त हो सकती है।
टिमोर ग्रीन पिजन के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: Treron psittaceus
- परिवार: कोलंबिडे (Columbidae – कबूतर और फाख्ता परिवार)
- शारीरिक विशेषता: इसका रंग कच्चे आम जैसा गहरा हरा होता है। यह एक फलभक्षी (frugivorous) पक्षी है जो मुख्य रूप से ‘अंजीर’ (figs) जैसे फलों पर निर्भर रहता है।
- वितरण (Distribution): यह प्रजाति मुख्य रूप से तिमोर द्वीप (इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते) और आसपास के छोटे द्वीपों जैसे रोटे, सेमाऊ, अताउरो और जाको के लिए स्थानिक है।
- जनसंख्या: हालिया शोध के अनुसार, अब जंगली अवस्था में केवल 100 से 500 के बीच पक्षी शेष बचे हैं, जबकि पहले इनका अनुमान 2,000 तक था।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रजाति अब इंडोनेशिया में ‘फंक्शनली एक्सटिंक्ट’ (कार्यात्मक रूप से विलुप्त) हो चुकी है। वहाँ इनकी संख्या इतनी कम है कि वे पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका निभाने या आबादी को फिर से बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं।
- सीमित: अब यह पक्षी मुख्य रूप से तिमोर-लेस्ते के लौटेम जिले (Lautem District) और निनो कोनिस संताना नेशनल पार्क (Nino Konis Santana National Park) के दूरदराज के जंगलों तक ही सीमित रह गया है।
विलुप्ति के प्रमुख कारण:
- अत्यधिक शिकार (Over-hunting): यह इनके विनाश का सबसे बड़ा कारण है। स्थानीय संस्कृति में भोजन के लिए इनका शिकार किया जाता है। जब ये फलों के पेड़ों पर झुंड में इकट्ठा होते हैं, तो शिकारियों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
- पर्यावास का विनाश (Habitat Loss): निचले इलाकों के मानसूनी जंगलों (Lowland Monsoon Forests) की तेजी से कटाई और खेती के लिए भूमि परिवर्तन ने इनके रहने और प्रजनन के स्थानों को नष्ट कर दिया है。
- सीमित भौगोलिक क्षेत्र: केवल कुछ द्वीपों तक सीमित होने के कारण पर्यावरणीय बदलावों या मानवीय हस्तक्षेप के प्रति ये अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: वर्तमान में इसे ‘Endangered’ (संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है।
- प्रस्तावित अपग्रेड: शोधकर्ताओं और BirdLife International ने इसे तत्काल ‘Critically Endangered’ (गंभीर रूप से संकटग्रस्त) श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय ध्यान और फंडिंग प्राप्त की जा सके।
- वालेसिया हॉटस्पॉट (Wallacea Hotspot): यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट जैव विविधता के लिए जाना जाता है, और तिमोर ग्रीन पिजन इस हॉटस्पॉट की सबसे खतरे वाली प्रजातियों में से एक बन गई है।
समाधान:
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को शिकार छोड़ने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और शिक्षा प्रदान की जाए।
- निगरानी में वृद्धि: इनके शेष बचे आवासों, विशेषकर लौटेम जिले में सख्त निगरानी और संरक्षण की आवश्यकता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: तिमोर-लेस्ते जैसे देशों में जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग बढ़ाना अनिवार्य है।