अहमदाबाद-धोलेरा सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल (CCEA) ने गुजरात में भारत की पहली पूर्णतः स्वदेशी तकनीक आधारित अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को मंजूरी दी।
- ₹20,667 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी कदम है, जो देश के पहले ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी (धोलेरा) को गुजरात के मुख्य आर्थिक केंद्र (अहमदाबाद) से जोड़ेगी।
परियोजना के प्रमुख तथ्य:
- कुल बजट व लंबाई: ₹20,667 करोड़ की लागत से 134 किलोमीटर लंबी डबल रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा।
- समय सीमा: इस परियोजना को वर्ष 2030-31 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
- गति क्षमता: यह 1676 मिमी (ब्रॉड गेज) पर विकसित दुनिया की पहली सेमी हाई-स्पीड प्रणाली होगी, जिसकी डिज़ाइन स्पीड 220 किमी/घंटा तथा परिचालन गति 200 किमी/घंटा होगी।
- यात्रा समय में कमी: इसके चालू होने के बाद अहमदाबाद (सरखेज) और धोलेरा के बीच की दूरी महज 34 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी।
-
कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों पर आधारित है, जो विभिन्न परिवहन माध्यमों को आपस में जोड़ता है:
- धोलेरा SIR: यह कॉरिडोर धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (DSIR) को सीधे जोड़ेगा, जिससे औद्योगिक परिवहन सुलभ होगा।
- धोलेरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए यह तीव्र पारगमन (Rapid Transit) लिंक प्रदान करेगा।
- लोथल मैरीटाइम हेरिटेज: सिंधु घाटी सभ्यता के ऐतिहासिक स्थल लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) को कनेक्टिविटी देकर पर्यटन को बढ़ावा देगा।
- हाई-स्पीड कॉरिडोर लिंकेज: यह मार्ग आगे चलकर अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर से भी जुड़ जाएगा।
महत्व:
- आत्मनिर्भर भारत: यह परियोजना पूरी तरह से भारत में विकसित स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यह कॉरिडोर देश के अन्य हिस्सों में आगामी सेमी हाई-स्पीड रेल विस्तार के लिए एक ‘रेफरेंस मॉडल’ (Reference Model) के रूप में कार्य करेगा।
- यातायात प्रणाली: इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका मिक्स्ड ट्रैफिक मॉडल है। एक ही ब्रॉड-गेज ट्रैक पर जहां यात्री ट्रेनें 220 किमी/घंटा की गति से चलेंगी, वहीं मालगाड़ियां (Freight Trains) 100 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। इससे माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी।
- औद्योगिक क्लस्टर्स: धोलेरा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) का एक प्रमुख नोड है। यह रेल लाइन इस क्षेत्र में उभर रहे सेमीकंडक्टर उद्योगों और सौर ऊर्जा उपकरण विनिर्माण इकाइयों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगी, क्योंकि इससे कुशल मानव संसाधन और कच्चे माल की आवाजाही आसान हो जाएगी।
- सतत विकास: यह परियोजना भारत के शुद्ध-शून्य (Net-Zero) कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य के अनुकूल है। इससे सालाना लगभग 0.48 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी।
- उत्सर्जन में कटौती: कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 2 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी, जो 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।