भारत-यूएई स्वर्ण समझौता

संदर्भ:
हाल ही में सरकार ने सोने और चांदी पर सीमा शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% (10% BCD + 5% AIDC) कर दिया है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव को कम किया जा सके। इस बढ़ोतरी के बावजूद, दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत UAE से आयातित सोने पर 1% की छूट बरकरार रहने की संभावना है।
भारत-यूएई स्वर्ण समझौता (India-UAE Gold Deal) क्या है?
यह दोनों देशों के बीच मई 2022 से प्रभावी व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) का एक रणनीतिक और व्यापारिक हिस्सा है। इस समझौते के तहत भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात होने वाले सोने पर सीमा शुल्क में विशेष रियायतें देता है।
समझौते के मुख्य बिंदु:
- टैरिफ रेट कोटा (TRQ) प्रणाली: इस समझौते के तहत एक निश्चित वार्षिक सीमा (कोटा) तक ही रियायती दर पर सोना आयात करने की अनुमति दी जाती है।
- 1% शुल्क की विशेष छूट: भारत के सामान्य आयात शुल्क (MFN Rate) की तुलना में UAE से आयातित इस कोटे वाले सोने पर 1% कम सीमा शुल्क (Duty Concession) लागू होता है।
- कोटे में क्रमिक वार्षिक वृद्धि: वर्ष 2022 में यह रियायती कोटा 120 टन से शुरू हुआ था। यह नियमबद्ध तरीके से प्रतिवर्ष बढ़ते हुए वर्ष 2027 तक 200 टन प्रति वर्ष हो जाएगा, जो भारत के वार्षिक स्वर्ण आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा होगा।
- पारदर्शी ई-नीलामी: महानिदेशक विदेश व्यापार (DGFT) द्वारा इस रियायती कोटे का आवंटन केवल वैध आभूषण निर्माताओं और MSME इकाइयों को पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) और इलेक्ट्रॉनिक ई-नीलामी के माध्यम से किया जाता है।
समझौते से लाभ:
- भारतीय आभूषण उद्योग को बढ़ावा: देश के रत्न और आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (GJEPC) के तहत आने वाले निर्यातकों को कम कीमत पर कच्चा माल (सोना) उपलब्ध होता है।
- भारतीय आभूषणों के लिए शून्य शुल्क: इस समझौते के बदले में यूएई भारतीय निर्मित तैयार आभूषणों (Finished Jewellery) के अपने देश में आयात पर 0% सीमा शुल्क लगाता है। इससे भारतीय आभूषणों को मध्य-पूर्व और वैश्विक बाजारों में भारी प्रतिस्पर्धी बढ़त मिली है।
- रोजगार सृजन: घरेलू आभूषण निर्माण और रिफाइनिंग इकाइयों में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने से इस श्रम-प्रधान क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
चुनौतियां:
- आयात बिल में भारी उछाल: समझौते के बाद दुबई से भारत आने वाले सोने में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यूएई से सोने का आयात 2022 के $2.9 बिलियन से बढ़कर 2025 तक $16.5 बिलियन हो गया, जिससे भारत की बाजार हिस्सेदारी में यूएई का योगदान 7.9% से बढ़कर 28% हो गया।
- विदेशी मुद्रा और CAD पर दबाव: वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल स्वर्ण आयात बिल $71.97 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसने देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार पर गहरा दबाव बनाया है।
- थर्ड-कंट्री री-रूटिंग का जोखिम: थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिकॉर्ड इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यूएई स्वयं सोने का खनन नहीं करता। आशंकाएं हैं कि अफ्रीका और अन्य देशों के सोने को केवल टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ (Rules of Origin) नियमों का उल्लंघन कर दुबई के रास्ते भारत भेजा जा रहा है।
- तस्करी और ग्रे-मार्केट को प्रोत्साहन: जानकारों का मानना है कि मई 2026 में भारत द्वारा शुल्क बढ़ाकर 15% किए जाने के बाद, यूएई के रास्ते अवैध सोने की तस्करी और ग्रे-मार्केट नेटवर्क को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है।