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दुर्लभ रेड-नेक्ड फाल्कन

दुर्लभ रेड-नेक्ड फाल्कन

Rare Red-Necked Falcon

संदर्भ:

हाल ही में, कवॉल टाइगर रिजर्व (Kawal Tiger Reserve) में एक अत्यंत दुर्लभ रेड-नेक्ड फाल्कन (Red-necked falcon) देखा गया।

रेड-नेक्ड फाल्कन के बारे मे:

  • वर्गीकरण और पहचान (Taxonomy): वैज्ञानिक रूप से इसे Falco chicquera कहा जाता है। यह मध्यम आकार का शिकारी पक्षी (रैप्टर) है, जिसे इसके विशिष्ट लाल-भूरे (Rufous) सिर, गर्दन और नीले-धूसर ऊपरी अंगों से पहचाना जाता है।
  • भौगोलिक वितरण (Distribution): इसकी दो असंबद्ध (Disjunct) आबादी पाई जाती है—एक भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश) में और दूसरी उप-सहारा अफ्रीका में।
  • आवास प्राथमिकता (Habitat): यह घने जंगलों से बचता है। यह मुख्य रूप से खुले मैदानों, शुष्क पर्णपाती वनों, झाड़ियों (Scrublands), कृषि क्षेत्रों और आर्द्रभूमियों के आसपास रहना पसंद करता है।
  • स्थानिक नाम (Local Names): भारत में इसके आकार और लिंग के आधार पर इसके अलग नाम हैं। पारंपरिक रूप से इसकी मादा को ‘तुरमुति’ (Turumti) और नर को ‘चटवा’ (Chatwa) कहा जाता है।
  • शिकार की अनूठी आदत (Hunting Behavior): यह मुख्य रूप से भोर (Dawn) और शाम (Dusk) के समय सक्रिय रहने वाला जीव है। यह अक्सर हवा में या पेड़ों पर जोड़ों में मिलकर शिकार (Hunting in pairs) करता है।
  • आहार संरचना (Diet Composition): इसके भोजन में लगभग 75% छोटे पक्षी (जैसे घरेलू गौरैया), 25% चमगादड़ (Pipistrellus), और कुछ मात्रा में कीड़े, गिलहरी तथा सरीसृप शामिल होते हैं।
  • प्रवासन की प्रकृति (Migration): यह मुख्य रूप से एक स्थानीय निवासी (Resident) पक्षी है, लेकिन मौसम और शिकार की उपलब्धता के अनुसार स्थानीय या खानाबदोश (Nomadic) गतिशीलता प्रदर्शित करता है।
  • प्रजनन और घोंसला (Breeding & Nesting): यह अक्सर ताड़ के पेड़ों (जैसे Borassus palms) पर प्रजनन करता है। यह आमतौर पर कौवों या अन्य बड़े शिकारी पक्षियों द्वारा छोड़े गए पुराने घोंसलों का उपयोग करता है।
  • संरक्षण स्थिति (Conservation Status): वैश्विक स्तर पर IUCN रेड लिस्ट में इसे ‘Near Threatened’ (संकटापन्न के करीब) श्रेणी में रखा गया है। 
    1. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत इसे अनुसूची-I (Schedule-I) की सुरक्षा प्राप्त है।
  • अस्तित्व पर मुख्य खतरे (Threats): कीटनाशकों (Pesticides) का बढ़ता उपयोग, वनों की कटाई के कारण खुले मैदानों का कम होना और मानवीय हस्तक्षेप इसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे हैं।

कवॉल टाइगर रिजर्व के बारे में:

  • भौगोलिक स्थिति (Location): यह तेलंगाना राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से (आदिलाबाद, मंचेरिअल, निर्मल जिलों) में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला और दक्कन प्रायद्वीप के केंद्रीय उच्चभूमि में स्थित है।
  • वैधानिक दर्जा (Status & Area): 1965 में स्थापित इस वन्यजीव अभ्यारण्य को वर्ष 2012 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,015 वर्ग किमी है।
  • अपवाह तंत्र (River Catchment): यह रिजर्व गोदावरी और उसकी सहायक नदी कदम (Kadam) के लिए एक प्रमुख जलभृत (Catchment area) का कार्य करता है, जो इसके दक्षिण से बहती हैं।
  • वनस्पति के प्रकार (Vegetation): यहाँ मुख्य रूप से दक्षिणी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Southern Tropical Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं, जिनमें सागौन (Teak) और बांस (Bamboo) की प्रचुरता है।
  • पारिस्थितिक संपर्क (Ecological Linkages): यह मध्य भारतीय बाघ परिदृश्य के सबसे दक्षिणी छोर पर है, जो महाराष्ट्र के तडोबा-अंधारी और छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के साथ गलियारा जोड़ता है।
  • समृद्ध जैव विविधता (Fauna): यहाँ बाघ, तेंदुए, गौर, चौसिंघा, चिंकारा, नीलगाय, जंगली कुत्ते और 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

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