भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप (2026-2030) को औपचारिक रूप से अपनाया गया।
- इस रोडमैप के तहत कुल 17 प्रमुख समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को भू-राजनीतिक और तकनीकी रणनीतिक गठबंधन में बदलने के लिए अपनाया गया हैं।
भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के मुख्य बिंदु:
- वार्षिक विदेश मंत्री तंत्र: रोडमैप की प्रगति की समीक्षा और रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की अध्यक्षता में वार्षिक संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है।
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड के समर्थन को रेखांकित किया है।
- पारस्परिक रसद सहायता समझौता (MLSA): सैन्य अभ्यासों के दौरान एक-दूसरे की सैन्य इकाइयों को रसद सहायता प्रदान करने के लिए MLSA की व्यवहार्यता पर काम शुरू किया गया है।
- इंडो-पैसिफिक समन्वय: नीदरलैंड की भारत-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रुचि को देखते हुए इसे इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) और इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) के ढांचे के साथ संरेखित किया गया है।
- रक्षा औद्योगिक रोडमैप: भारतीय रक्षा निर्माता समाज (SIDM) और डच रक्षा एवं सुरक्षा उद्योग (NIDV) के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
- साइबर और आतंकवाद विरोध: उभरती प्रौद्योगिकियों (जैसे ड्रोन और वर्चुअल एसेट) के दुरुपयोग को रोकने के लिए ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ के माध्यम से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्तर पर सहयोग मजबूत किया गया है।
- सेमीकंडक्टर ब्रेन ब्रिज (Brain Bridge): डच सेमीकंडक्टर दिग्गज ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच गुजरात के धोलेरा में उन्नत सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा विकसित करने के लिए ऐतिहासिक समझौता हुआ।
- गहन तकनीक अनुसंधान: डच सेमीकंडक्टर कंबेटेंस सेंटर को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) से जोड़ा गया है, जिससे AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और फोटोनिक्स में संयुक्त अनुसंधान संभव होगा।
- क्रिटिकल मिनरल्स: भविष्य की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग का समझौता किया गया है।
- ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप: भारत से ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात को बढ़ावा देने और रोटरडैम बंदरगाह (Port of Rotterdam) के माध्यम से यूरोप तक भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने के लिए एक समर्पित ग्रीन मैरीटाइम कॉरिडोर की योजना है।
- ऊर्जा संक्रमण: नीति आयोग (NITI Aayog) और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा सुरक्षा और संधारणीय विकास के लिए क्षमता निर्माण प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया गया है।
- जल नवाचार: ‘वाटर एज लीवरेज’ (Water as Leverage) मॉडल के माध्यम से गंगा बेसिन के शहरों में ‘शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं’ लागू की जा रही हैं. गुजरात के कल्पसर (Kalpasar) प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग का समझौता हुआ।
- कृषि तकनीक (Ag-Tech): पश्चिम त्रिपुरा में फूलों के लिए और बेंगलुरु में डेयरी प्रशिक्षण के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है।
- वन हेल्थ (One Health): भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और डच राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य संस्थान (RIVM) ने संक्रामक रोगों और एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर अनुसंधान के लिए समझौता किया है।
- गतिशीलता और प्रवासन (Mobility and Migration): छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को सरल बनाने और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए समझौता लागू किया गया।
- सांस्कृतिक पुनर्स्थापन: नीदरलैंड द्वारा 11वीं सदी के चोल राजवंश के ताम्रपत्रों (Chola Copper Plates) को भारत को लौटाया गया, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत की बड़ी जीत है।