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स्वीडन का प्रतिष्ठित रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार सम्मान

स्वीडन का प्रतिष्ठित रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार सम्मान

Sweden prestigious Royal Order of the Polar Star

संदर्भ:

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन का प्रतिष्ठित ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ (कमांडर ग्रैंड क्रॉस) सम्मान प्रदान किया गया है। स्वीडन की अपनी आधिकारिक राजनयिक यात्रा के दौरान 17 मई 2026 को गोथेनबर्ग में आयोजित एक विशेष समारोह में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया ने उन्हें यह सम्मान सौंपा।

रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार के बारे में:

‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ (स्वीडिश: Nordstjärneorden) स्वीडन का एक ऐतिहासिक और अत्यंत प्रतिष्ठित राजकीय सम्मान है। यह पुरस्कार मुख्य रूप से असाधारण सार्वजनिक सेवाओं, राष्ट्रीय हितों की उन्नति और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रदान किया जाता है। 

  • संस्थापक: इस आदेश (Order) की स्थापना स्वीडन के राजा फ्रेडरिक प्रथम (King Frederick I) द्वारा 23 फरवरी 1748 को की गई थी। 
    • इसी दिन स्वीडन के दो अन्य ऐतिहासिक पुरस्कारों (‘ऑर्डर ऑफ द सोर्ड’ और ‘ऑर्डर ऑफ द सेराफिम’) को भी संहिताबद्ध किया गया था।
  • दार्शनिक प्रतीकवाद: ऐतिहासिक रूप से यह पुरस्कार ‘प्रबुद्धता’ (Enlightenment) से प्रेरित था। इसका उद्देश्य नागरिक योग्यता, विज्ञान, साहित्य, और संस्थागत कर्तव्यों को पुरस्कृत करना था, जो अज्ञानता के अंधेरे को भेदने वाले ध्रुव तारे का प्रतीक है। 
  • 1975 के ऐतिहासिक सुधार: वर्ष 1975 में स्वीडन ने अपने मानद आदेशों में बड़ा संरचनात्मक बदलाव किया।
    • इसके तहत स्वीडनी नागरिकों को यह सम्मान देना बंद कर दिया गया और इसे विशेष रूप से विदेशी नागरिकों, संप्रभुओं, राजघरानों और विदेशी सरकार के प्रमुखों (Heads of Government) के लिए आरक्षित कर दिया गया, जिन्होंने स्वीडन के वैश्विक हितों को आगे बढ़ाया।
  • 2023 का पुनरुद्धार: वर्ष 2023 में स्वीडिश सरकार ने अपने नियमों में पुनः संशोधन किया, जिसके तहत अब यह पुरस्कार विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ असाधारण सेवाओं के लिए पुनः स्वीडिश नागरिकों को भी दिया जाने लगा है।
  • प्रोटोकॉल: स्वीडिश परंपरा के अनुसार, इस पुरस्कार के पदक और प्रतीक चिन्ह प्राप्तकर्ता के जीवनकाल तक ही पास रहते हैं। प्राप्तकर्ता के निधन के बाद इन राजकीय आभूषणों को सम्मानपूर्वक ‘शाही शूरवीरता आदेश’ (Royal Orders of Knighthood) को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।

सम्मान की श्रेणियां:

यह पुरस्कार पदानुक्रम के आधार पर 5 प्रमुख श्रेणियों (Grades) में विभाजित है: 

  • कमांडर ग्रैंड क्रॉस (Commander Grand Cross – KmstkNO): यह सर्वोच्च श्रेणी है, जो विदेशी शासनाध्यक्षों और राजाओं को दी जाती है।
  • कमांडर फर्स्ट क्लास (Commander 1st Class – KNO1kl)
  • कमांडर (Commander – KNO)
  • नाइट/सदस्य फर्स्ट क्लास (Knight/Member 1st Class – RNO1kl)
  • नाइट/सदस्य (Knight/Member – RNO) 

प्रतीक चिन्ह और डिजाइन:

  • बिल्ला (Badge): इसका मुख्य प्रतीक सफेद रंग का इनेमल युक्त ‘माल्टीज़ क्रॉस’ (Maltese Cross) है। 
    • इसके केंद्र में एक गहरे नीले रंग का पदक होता है, जिस पर पांच कोनों वाला चांदी का ध्रुव तारा और इस सम्मान का आदर्श वाक्य अंकित होता है।
  • आदर्श वाक्य (Motto): इसका आधिकारिक लैटिन मोटो “Nescit Occasum” है, जिसका अर्थ है ‘यह कभी अस्त नहीं होता’ (ध्रुव तारे की निरंतरता का प्रतीक)।
  • रिबन का रंग (Ribbon Evolution): मूल रूप से इसका रिबन काला होता था, ताकि इसके ऊपर सफेद और सुनहरा क्रॉस अज्ञानता के अंधेरे में ज्ञान के प्रकाश की तरह चमके। 
    • 1975 से 2022 के बीच विदेशी प्राप्तकर्ताओं के लिए स्वीडन के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से प्रेरित पीले किनारों वाला हल्का नीला रिबन उपयोग किया गया। 
    • 2023 के सुधारों के बाद इसके मूल काले रिबन की परंपरा को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।

सर्वोच्च कॉलर (Grand Cross Collar): सर्वोच्च श्रेणी के तहत प्राप्तकर्ता को एक स्वर्ण श्रृंखला (कॉलर) भी दी जाती है, जिसमें गहरे नीले रंग के शाही मोनोग्राम और सफेद ध्रुव तारे एकांतर क्रम में जुड़े होते हैं। इसके साथ ही छाती के बाईं ओर पहनने के लिए आठ कोनों वाला चांदी का स्टार दिया जाता है।

इबोला वायरस रोग (EVD):

  • परिचय: इबोला वायरस रोग (EVD) एक घातक और अत्यधिक संक्रामक बीमारी है।
  • वायरस का प्रकार: यह फिलोविरीडे परिवार के ऑर्थोइबोलावायरस के कारण होने वाला एक वायरल रक्तस्रावी बुखार (Haemorrhagic Fever) है।
  • प्राकृतिक मेजबान: इसके प्राकृतिक वाहक फ्रूट बैट्स (Fruit bats) यानी चमगादड़ माने जाते हैं।
  • जूनोटिक संचरण: यह संक्रमित जानवरों (चिंपैंजी, बंदर, चमगादड़) के सीधे संपर्क से इंसानों में फैलता है।
  • मानव-से-मानव प्रसार: संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, पसीने या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है।
  • लक्षण: अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, डायरिया और गंभीर स्थिति में आंतरिक व बाहरी रक्तस्राव।
  • इन्क्यूबेशन पीरियड: वायरस के शरीर में प्रवेश से लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन का समय लगता है।
  • उच्च मृत्यु दर: इस बीमारी में मृत्यु दर अत्यंत उच्च है, जो विभिन्न स्ट्रेन के आधार पर 25% से 90% तक होती है।
  • स्ट्रेन और टीके: इसके 6 स्ट्रेन हैं। ‘जायरे स्ट्रेन’ के लिए टीके (जैसे Ervebo) उपलब्ध हैं, लेकिन ‘बुंडीबुग्यो’ जैसे स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत टीका नहीं है 
  • उपचार: इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है; केवल शुरुआती लक्षणों के आधार पर सपोर्टिव केयर (Monoclonal antibodies और हाइड्रेशन) दी जाती है।

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