इबोला प्रकोप 2026

संदर्भ:
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ (PHEIC) घोषित किया।
- PHEIC, WHO के ‘अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR 2005)’ के तहत एक असाधारण स्थिति है जो अन्य देशों में बीमारी फैलने का जोखिम पैदा करती है और इसके लिए त्वरित अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होती है।
इबोला प्रकोप 2026: वर्तमान आंकड़े और भौगोलिक प्रसार
- संक्रमण के केंद्र: इस प्रकोप का मुख्य केंद्र DRC की इटुरी (Ituri) प्रांत है। इसके तहत मुख्य रूप से तीन स्वास्थ्य क्षेत्र—बुन्या (Bunia), रम्पारा (Rwampara) और मोंगब्वालु (Mongbwalu) सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
- मामले और मौतें: अफ्रीका सीडीसी (Africa CDC) और डब्ल्यूएचओ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अब तक 336 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। कांगो में 88 मौतें हो चुकी हैं, जबकि युगांडा में भी एक मौत दर्ज की गई है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रसार: संक्रमण सीमाओं को पार कर चुका है। युगांडा की राजधानी कंपाला (Kampala) में DRC से यात्रा करके आए दो लोगों में लैब-पुष्टि वाले मामले मिले हैं।
- वायरस का प्रकार: यह प्रकोप इबोला के सबसे दुर्लभ बुंडीबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus) स्ट्रेन के कारण फैला है। यह इतिहास में केवल तीसरी बार (इससे पहले 2007 और 2012 में) सक्रिय हुआ है।
- वैक्सीन और इलाज का अभाव: इबोला के प्रसिद्ध ‘जायरे स्ट्रेन’ के विपरीत, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए वर्तमान में कोई भी स्वीकृत वैक्सीन (Vaccine) या विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। चिकित्सा केवल शुरुआती ‘सपोर्टिव केयर’ (जैसे हाइड्रेशन) पर निर्भर है।
- मृत्यु दर: ऐतिहासिक रूप से इस विशिष्ट वेरिएंट की मृत्यु दर 25% से 50% के बीच रही है।
जटिल चुनौतियाँ और जोखिम कारक:
- मानवीय संकट: इटुरी प्रांत एक अस्थिर और संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्र है, जहां वर्तमान में 2.7 लाख से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोग (IDPs) रह रहे हैं। इस भीड़भाड़ और असुरक्षा के कारण कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और निगरानी करना बेहद कठिन हो रहा है।
- स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण: अस्पतालों में बुनियादी ‘इन्फेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल’ (IPC) की कमी के कारण कम से कम 4 अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हो चुकी है, जिससे अस्पतालों के भीतर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
- क्षेत्रीय और वैश्विक खतरा: यह क्षेत्र एक बड़ा व्यापारिक हब है। उच्च जनसंख्या गतिशीलता के कारण पड़ोसी देशों (जैसे दक्षिण सूडान) में इसके फैलने का अत्यधिक उच्च जोखिम है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि यह वर्तमान में पैंडेमिक (वैश्विक महामारी) के मानदंडों को पूरा नहीं करता क्योंकि यह हवा से नहीं फैलता। अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों ने सीमाओं पर ‘एन्हांस्ड ट्रैवल स्क्रीनिंग’ लागू कर दी है।
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इबोला वायरस रोग (EVD):
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