भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

संदर्भ:
हाल ही में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित किया गया।
तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2026 के मुख्य फोकस क्षेत्र:
- हरित प्रौद्योगिकी रणनीतिक साझेदारी (Green Strategic Partnership): भारत और नॉर्डिक ब्लॉक ने अपने संबंधों को आधिकारिक तौर पर एक विश्वस्त ‘हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में उन्नत किया है। इसका उद्देश्य नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करना और भारी उद्योगों को कार्बन-मुक्त करना है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत का समर्थन: पांचों नॉर्डिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का पुरजोर समर्थन दोहराया। साथ ही, भारत के ‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह’ (NSG) में प्रवेश का भी समर्थन किया।
- आर्थिक और निवेश सहयोग (EFTA-TEPA): मार्च 2024 में हस्ताक्षरित भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA), जो अक्टूबर 2025 से लागू हुआ, इस बैठक का मुख्य आर्थिक स्तंभ रहा। इसके तहत आगामी 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है।
- प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और रक्षा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लोकतांत्रिक उपयोग, सुरक्षित 5G/6G अवसंरचना और वैश्विक AI शासन ढांचे पर बल दिया गया। इसरो (ISRO) और नॉर्वेजियन स्पेस एजेंसी के बीच नए रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर हुए। रक्षा क्षेत्र में, भारत ने नॉर्डिक रक्षा कंपनियों के लिए भारतीय रक्षा गलियारों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की बात रेखांकित की।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन क्या हैं?
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भारत और पांच नॉर्डिक देशों—नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के बीच आयोजित होने वाला एक बहुपक्षीय राजनयिक मंच है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बाद भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ नॉर्डिक देशों का सामूहिक रूप से इस स्तर का शिखर सम्मेलन होता है।
- स्थापना और इतिहास: इस मंच की शुरुआत वर्ष 2018 में स्टॉकहोम (स्वीडन) से हुई थी। इसके बाद दूसरा सम्मेलन 2022 में कोपेनहेगन (डेनमार्क) और तीसरा सम्मेलन मई 2026 में ओस्लो (नॉर्वे) में आयोजित किया गया।
- हरित साझेदारी (Green Partnership): वर्ष 2026 के सम्मेलन में इस रणनीतिक सहयोग को आधिकारिक तौर पर ‘हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में उन्नत किया गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई पर केंद्रित है।
- आर्थिक स्तंभ (EFTA & Trade): इस सहयोग को भारत-EFTA समझौते (TEPA) से बड़ी ताकत मिली है, जिसके तहत भारत में 100 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
- तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग: इसमें 5G/6G संचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन, अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO और नॉर्डिक एजेंसियों के मध्य समझौते) और ब्लू इकोनॉमी शामिल हैं।
महत्व:
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- भू-राजनीतिक एवं बहुपक्षीय मंच: नॉर्डिक देशों की सामूहिक अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की है। वैश्विक स्तर पर ये देश नवाचार, मानव विकास और सतत सूचकांकों में शीर्ष पर हैं। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारत ने नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करने के लिए नॉर्डिक ब्लॉक को एक प्राकृतिक भागीदार (Natural Partner) माना है।
- आर्कटिक परिषद और रणनीतिक पहुंच: सभी 5 नॉर्डिक देश आर्कटिक परिषद (Arctic Council) के सदस्य हैं। भारत इस परिषद का एक ‘पर्यवेक्षक देश’ है। चीन की ‘पोलर सिल्क रोड’ (Polar Silk Road) पहल और रूस-चीन के बढ़ते आर्कटिक प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को इस क्षेत्र में मजबूत रणनीतिक पैर जमाने की आवश्यकता है। भारत चेन्नई-व्लादिवोस्तोक गलियारे को मरमांस्क और नॉर्डिक क्षेत्र तक विस्तारित करने पर विचार कर रहा है।
- तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ: प्रत्येक नॉर्डिक देश विशिष्ट क्षेत्रों में अग्रणी है जिसका लाभ भारत अपने विकास एजेंडे (जैसे ‘मेक इन इंडिया’ या ‘स्मार्ट सिटी’) के लिए उठा सकता है:
- आइसलैंड: भू-तापीय (Geothermal) ऊर्जा और कार्बन कैप्चर तकनीक।
- नॉर्वे: डीप-सी माइनिंग, ग्रीन शिपिंग और सॉवरेन वेल्थ फंड (GPFG) जो भारत में पहले ही 28 बिलियन डॉलर निवेश कर चुका है।
- स्वीडन: उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) और अपशिष्ट प्रबंधन।
- फिनलैंड: दूरसंचार (Telecom), 5G/6G विकास और डिजिटल नवाचार।
- डेनमार्क: अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind) और हरित हाइड्रोजन।