केंद्रीयकृत खाद्य निगरानी प्रणाली

संदर्भ:
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश में खाद्य सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने के लिए एक केंद्रीयकृत खाद्य निगरानी प्रणाली (Centralised Food Surveillance System) लागू करने की योजना बनाई है।
केंद्रीयकृत खाद्य निगरानी प्रणाली (Centralised Food Surveillance System) क्या है?
भारत सरकार द्वारा देश में खाद्य सुरक्षा और मानकों की जांच को एक समान, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी नियामक ढांचा है। यह एक ऐसी डिजिटल और एकीकृत प्रणाली होगी, जिसके तहत देश भर के बाजारों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करने, उनकी प्रयोगशालाओं में जांच करने, और रिपोर्ट के आधार पर स्वचालित डिजिटल अलर्ट उत्पन्न करने की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर से नियंत्रित किया जाएगा।
- इस व्यवस्था को लागू करने और इसके प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की होगी। यह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त सांविधिक निकाय है।
मुख्य उद्देश्य:
- भ्रष्टाचार और पक्षपात को रोकना: दोहरी भूमिका को समाप्त कर व्यवसायों को मनमाने ढंग से निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना इसका लक्ष्य होगा।
- मानकीकरण (Standardisation): पूरे देश में खाद्य सुरक्षा जांच के मापदंडों में एकरूपता सुनिश्चित करना।
- त्वरित कार्रवाई (Rapid Response): मिलावटी या असुरक्षित भोजन की पहचान होने पर तुरंत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संबंधित बैच को बाजार से हटाना (Food Recall)।
प्रमुख विशेषताएं:
- तटस्थ एजेंसियों द्वारा सैंपलिंग: इस प्रणाली के तहत बाजार से नमूने एकत्र करने का कार्य सरकारी अधिकारियों के बजाय निविदा प्रक्रिया (Bidding Process) द्वारा चुनी गई स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसियों (Neutral Third-Party Agencies) को सौंपने की योजना है।
- आपूर्ति शृंखला पर ध्यान: प्रस्तावित नियमों के अनुसार, कुल निगरानी नमूनों का 50% हिस्सा बड़ी और संगठित आपूर्ति शृंखलाओं (Organised Supply Chains) से लिया जाएगा।
- केंद्रीय भुगतान प्रणाली: जांच करने वाली प्रयोगशालाओं को भुगतान सीधे FSSAI मुख्यालय द्वारा किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार के साठगांठ की संभावना समाप्त होगी।
- एकीकरण: इसे हाल ही में FSSAI द्वारा लॉन्च किए गए डिजिटल FoSCoS ‘फूड रिकॉल मॉड्यूल’ के साथ पूरी तरह एकीकृत किया जाएगा, जिससे देश में खाद्य आपातकाल से निपटने की पूरी प्रक्रिया स्वचालित हो सकेगी।
कार्य प्रणाली:
इस प्रस्तावित प्रणाली को मुख्य रूप से चार चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा:
- सैंपल संग्रह: स्वतंत्र एजेंसियां बाजार से खाद्य पदार्थों के नमूने खरीदेंगी।
- प्रयोगशाला परीक्षण: अनुमोदित राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं (Approved Labs) इन नमूनों की जांच करेंगी।
- डेटा अपलोड: परीक्षण के परिणामों को सीधे राष्ट्रीय डेटाबेस पर अपलोड किया जाएगा।
- डिजिटल अलर्ट: यदि कोई नमूना असुरक्षित पाया जाता है, तो प्रणाली स्वचालित रूप से बैच नंबर के साथ एक डिजिटल अलर्ट उत्पन्न करेगी, जो सीधे संबंधित राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के पास कानूनी कार्रवाई हेतु भेजा जाएगा।
महत्व:
- निरीक्षक राज का अंत: यह व्यवस्था राज्यों के अधिकारियों की विवेकाधीन शक्तियों को कम करेगी, जिससे खाद्य व्यवसायों (FBOs) के लिए ‘व्यापार सुगमता’ (Ease of Doing Business) बढ़ेगी।
- उपभोक्ता सुरक्षा: डिजिटल रूप से संचालित होने के कारण दूषित खाद्य उत्पादों को बहुत तेजी से ब्लॉक किया जा सकेगा, जिससे जनस्वास्थ्य की रक्षा होगी।
- डेटा-संचालित नीतियां: एक केंद्रीय डेटाबेस होने से भविष्य में जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) और खाद्य मानक तय करने में वैज्ञानिक डेटा का सटीक उपयोग संभव हो सकेगा।