भारत औद्योगिक विकास योजना

संदर्भ:
हाल ही में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने ₹33,660 करोड़ के बजट वाली ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ (BHAVYA) के संचालन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए।
भारत औद्योगिक विकास योजना क्या हैं?
भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA – Bharat Audyogik Vikas Yojna) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे देश के भीतर निवेश के लिए तैयार, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्कों का नेटवर्क स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
नोडल मंत्रालय:
- मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry)।
- विभाग: मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC), जो राज्यों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी (PPP मॉडल) में इसे लागू कर रही है।
उद्देश्य:
- प्लग-एंड-प्ले इकोसिस्टम का विकास: उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण, बिजली-पानी और मंजूरी की बाधाओं को खत्म कर ‘आशय से उत्पादन’ (Intent to Production) के समय को न्यूनतम करना।
- विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा: देश की विनिर्माण (Manufacturing) जीडीपी और औद्योगिक विकास दर को बढ़ाना।
- वैश्विक निवेश को आकर्षित करना: सुव्यवस्थित एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और घरेलू MSMEs के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना।
- रोजगार सृजन: विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लाखों अवसर पैदा करना।
- आत्मनिर्भर और विकसित भारत: देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक प्रमुख केंद्र बनाकर आत्मनिर्भरता हासिल करना।
मुख्य विशेषताएं:
- वित्तीय आवंटन और समय-सीमा: योजना के लिए कुल ₹33,660 करोड़ का बजटीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह (6) वर्षों की अवधि के लिए संचालित होगी।
- भूमि और आकार मानदंड: इन पार्कों का आकार सामान्य राज्यों के लिए 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा। पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए न्यूनतम सीमा घटाकर 25 एकड़ की गई है।
- वित्तीय सहायता संरचना:
- आंतरिक अवसंरचना (सड़कें, जल निकासी, प्रशासनिक भवन, श्रमिकों के आवास) के विकास के लिए केंद्र सरकार ₹1 करोड़ प्रति एकड़ तक की सहायता देगी।
- बाहरी कनेक्टिविटी (हाईवे, रेलवे लाइनों से जुड़ाव) के लिए परियोजना लागत का 25% तक केंद्र वहन करेगा।
- चैलेंज मोड (Challenge Mode) चयन: इन 100 औद्योगिक पार्कों का चयन राज्यों के बीच एक प्रतिस्पर्धी ‘चैलेंज मोड’ के आधार पर होगा, जिससे केवल उच्च गुणवत्ता वाले और निवेश-अनुकूल नीति सुधार करने वाले प्रस्तावों को ही चुना जाएगा।
- पीएम गतिशक्ति एकीकरण: सभी पार्कों को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी सिद्धांतों के तहत विकसित किया जाएगा।
- सतत और भविष्योन्मुखी विकास: इसमें ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD), हरित ऊर्जा ग्रिड, सौर अनुपालन और रखरखाव के लिए एकीकृत भूमिगत यूटिलिटी कॉरिडोर (नो-डिग वातावरण) शामिल होंगे।
महत्व:
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) में सुधार: पूर्व-अनुमोदित नियामक मंजूरी और रेडी-टू-यूज़ इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेशकों के लिए लालफीताशाही और प्रशासनिक बाधाओं को काफी हद तक कम कर देंगे।
- क्षेत्रीय औद्योगिक संतुलन: देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस योजना का विस्तार होने से पिछड़े और पहाड़ी क्षेत्रों का भी तीव्र औद्योगीकरण होगा।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: क्लस्टर-आधारित विकास दृष्टिकोण के कारण उद्योगों, कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं का एक ही स्थान पर सह-स्थान (Co-location) संभव होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
- MSMEs और स्टार्टअप्स का सशक्तिकरण: छोटे व्यवसायों को भारी पूंजी लगाकर बुनियादी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी, वे सीधे इन पार्कों में बनी-बनाई फैक्ट्रियों (Ready-made factory sheds) में काम शुरू कर सकेंगे।