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भारत-अमेरिका दुर्लभ खनिज समझौता

भारत-अमेरिका दुर्लभ खनिज समझौता

India-US Rare Minerals Agreement

 

संदर्भ:

हाल ही में भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements – REEs) की सुरक्षित व लचीली आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक द्विपक्षीय ढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 

समझौते के प्रमुख स्तंभ और केंद्रित क्षेत्र:

  • खनन संचालन (Mining Operations): दोनों देश मिलकर खनिजों के नए स्रोतों की खोज और सुरक्षित निष्कर्षण पर काम करेंगे।
  • खनिज प्रसंस्करण (Processing Technologies): कच्चे अयस्क को शुद्ध और उपयोग योग्य सामग्रियों में बदलने के लिए तकनीकी सहयोग साझा किया जाएगा।
  • पुनर्चक्रण (Recycling): ई-कचरे और पुराने स्क्रैप से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • रणनीतिक निवेश व वित्तपोषण: अमेरिकी सरकार ने निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए $30 बिलियन से अधिक के निवेश, ऋण और सहायता का प्रावधान किया है। 

महत्व:

  • चीन के एकाधिकार का मुकाबला: वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) के प्रसंस्करण पर चीन का लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण है। चीन द्वारा समय-समय पर लगाए जाने वाले निर्यात प्रतिबंधों (जैसे गैलियम और जर्मेनियम पर प्रतिबंध) से वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन बाधित होती है। यह समझौता भारत और अमेरिका को ‘एकल-स्रोत एकाधिकार’ के भू-राजनीतिक दबाव से मुक्त करेगा। 
  • चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) की सुरक्षा: महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यह समझौता सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), स्वच्छ ऊर्जा उपकरण (जैसे सोलर पैनल, विंड टरबाइन) और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों (मिसाइल और रडार) के लिए कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। 
  • तकनीकी जुड़ाव का विकास: यह समझौता पूर्ववर्ती विकासों पर आधारित है, जिसमें फरवरी 2025 की भारत-अमेरिका संयुक्त नेता वक्तव्य दृष्टि और 20 फरवरी 2026 को भारत का अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ (Pax Silica Declaration) में शामिल होना शामिल है। यह AI और सेमीकंडक्टर सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सक्षम है।

भारत के लिए निहितार्थ:

  • तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत में खनिज भंडार (जैसे मोनाजाइट में 7.23 मिलियन टन दुर्लभ मृदा ऑक्साइड) तो हैं, लेकिन उन्नत प्रसंस्करण अवसंरचना और परिष्कृत तकनीक की कमी है। अमेरिकी सहयोग से भारत घरेलू प्रसंस्करण क्षमताओं का विकास कर सकेगा।
  • ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर्स’ को बढ़ावा: भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय बजट (2026-2027) में ओडिशा, केरल, आंध्र Pradesh और तमिलनाडु में दुर्लभ मृदा गलियारे (Rare Earth Corridors) बनाने की नीति घोषित की है। इस समझौते से इन गलियारों में विदेशी निवेश और उच्च-प्रदर्शन वाले चुम्बकों के निर्माण को गति मिलेगी।
  • बहुपक्षीय मंचों पर सुदृढ़ीकरण: द्विपक्षीय समझौते के साथ ही क्वाड देशों (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने भी $20 बिलियन के खनिज कोष के साथ एक बहुपक्षीय फ्रेमवर्क बनाया है, जिससे भारत की खनिज सुरक्षा को बहुस्तरीय सुरक्षा कवच प्राप्त होगा। 

भारत और अमेरिका महत्वपूर्ण खनिज सहयोग:  

  • खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP – 2023): भारत जून 2023 में अमेरिकी नेतृत्व वाली ‘मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ में शामिल हुआ, जिसका उद्देश्य टिकाऊ और लचीली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है।
  • रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU – 2024): सितंबर 2024 में दोनों देशों ने लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
  • द्विपक्षीय ढांचा समझौता (Framework Agreement – 2025): 2025 में ‘क्वाड’ बैठक के दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ तत्वों (REEs) की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए।
  • पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन (Pax Silica Declaration – 2026): फरवरी 2026 में भारत अमेरिकी नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन में शामिल हुआ, जो सेमीकंडक्टर और एआई (AI) सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति को बढ़ावा देता है।

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