नागोया प्रोटोकॉल पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट

संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) के सचिवालय को नागोया प्रोटोकॉल ऑन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि के प्रगति विवरण को कवर किया गया है।
नागोया प्रोटोकॉल और ABS:
- मूल संधि: यह ‘कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी’ (CBD, 1992) के तहत एक पूरक वैश्विक समझौता है।
- उद्देश्य: आनुवंशिक संसाधनों (Genetic Resources) के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों का न्यायसंगत और निष्पक्ष वितरण (ABS) सुनिश्चित करना।
- अपनाने की तिथि: इसे वर्ष 2010 में नागोया (जापान) में अपनाया गया और 12 अक्टूबर 2014 से लागू किया गया।
- भारत की स्थिति: भारत ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के माध्यम से इसके प्रावधानों को घरेलू स्तर पर बहुत पहले ही लागू कर दिया था।
पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) के मुख्य निष्कर्ष:
- वैश्विक अनुपालन में नेतृत्व (Global Leadership): भारत ने ABS क्लीयरिंग-हाउस पर 3,556 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCC) जारी किए हैं। यह संख्या पूरे वैश्विक कुल का लगभग 60% है, जो भारत की पारदर्शिता को दर्शाती है।
- संसाधन और वित्तीय संग्रहण: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने ABS के माध्यम से ₹216.31 करोड़ जुटाए, जिसमें से ₹139.69 करोड़ सीधे स्थानीय समुदायों और किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) ने अतिरिक्त ₹51.96 करोड़ जुटाए हैं।
- गैर-मौद्रिक लाभ (Non-Monetary Benefits): लगभग 395 ABS स्वीकृतियों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण जैसे गैर-मौद्रिक लाभ शामिल किए गए हैं।
- विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था: देश भर में जमीनी स्तर पर 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही 2.56 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।
- राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान: यह रिपोर्ट भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) के लक्ष्य 13 (Target 13) को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है।
भारत की त्रि-स्तरीय ABS संरचना
|
स्तर |
प्रमुख नोडल एजेंसी |
प्राथमिक कार्य एवं अधिकार |
|
राष्ट्रीय स्तर |
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) |
विदेशी संस्थाओं को जैविक संसाधनों तक पहुंच की अनुमति देना और वैश्विक अनुपालन (IRCC) देखना। |
|
राज्य स्तर |
राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) |
भारतीय संस्थाओं द्वारा जैविक संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग को विनियमित करना। |
|
स्थानीय स्तर |
जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) |
स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण और पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) तैयार करना। |
मुख्य चुनौतियाँ:
- डेटा एकीकरण की कमी: शोधकर्ताओं और राज्य एजेंसियों के लिए पुराने या ऐतिहासिक ABS डेटा तक पहुंचना अभी भी कठिन है।
- उत्पत्ति का पता लगाने की समस्या (Traceability): थोक बाजारों से खरीदे जाने वाले औषधीय पौधों की वास्तविक उत्पत्ति (स्रोत्र गांव) का पता लगाना एक जटिल कार्य है।
- भाषाई बाधा: क्षेत्रीय भाषाओं में ABS दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण ग्राम पंचायतें समझौतों की शर्तों को ठीक से समझने और बातचीत करने में असमर्थ रहती हैं।
- मैनुअल डेटा प्रबंधन: जटिल समझौतों से डेटा निकालने और वैश्विक प्रमाणपत्र बनाने के लिए अधिकारी आज भी मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर है
आगे की राह:
- डिजिटल बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण: प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए ब्लॉकचेन आधारित ट्रेसिबिलिटी और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाना चाहिए।
- संसाधनों का सटीक आर्थिक मूल्यांकन: जैविक संसाधनों के आर्थिक मूल्य का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियां तैयार की जाएं।
- स्थानीय सशक्तिकरण: BMCs को कानूनी और भाषाई सहायता प्रदान की जाए ताकि वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समान शर्तों पर पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों (MAT) पर हस्ताक्षर कर सकें।