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खेत बचाओ अभियान (farm save campaign)

खेत बचाओ अभियान (farm save campaign)

farm save campaign

 

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) का आधिकारिक शुभारंभ किया।

खेत बचाओ अभियान क्या हैं?

‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन है। 

  • इसकी शुरुआत 1 जून 2026 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया (रमासिया) गांव से इस की गई। 
  • यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे एक महीने के लिए संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य नारा “कम खाद, सही खाद, समझदारी से खाद” रखा गया है। 

अभियान की आवश्यकता क्यों?

भारतीय कृषि वर्तमान में गंभीर संकटों से गुजर रही है, जिसमें लगातार बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) व कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग और घटती मृदा उर्वरता (Declining Soil Fertility) शामिल हैं। अत्यधिक रसायनों के कारण खेतों की प्राकृतिक उत्पादन क्षमता नष्ट हो रही है और किसानों की इनपुट लागत (Input Cost) लगातार बढ़ रही है। इसी पारिस्थितिक और आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए इस जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। 

‘खेत बचाओ अभियान’ के मुख्य उद्देश्य:

  • संतुलित उर्वरक उपयोग (Balanced Fertilizer Use): अंधाधुंध रासायनिक खादों के उपयोग को रोककर मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर केवल आवश्यक पोषक तत्व डालने के लिए प्रेरित करना। 
  • मिट्टी की सेहत में सुधार (Soil Health Improvement): जैविक खादों (Organic Fertilizers), हरी खाद (Green Manuring) और बायो-फर्टिलाइजर्स के उपयोग को बढ़ाकर मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य को बहाल करना।
  • सतत और जलवायु-अनुकूल कृषि (Sustainable & Climate-Resilient Agriculture): पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना। [4, 7]
  • जल संरक्षण (Water Conservation): खेती में पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना। 
  • नकली कृषि इनपुट की पहचान (Counterfeit Input Identification): बाजार में बिकने वाले नकली बीज, नकली खाद और नकली कीटनाशकों की पहचान करने के लिए किसानों को प्रशिक्षित करना। 
  • सरकारी योजनाओं का एकीकरण (Convergence of Government Schemes): इस अभियान के जरिए ग्रामीण स्तर पर कृषि से जुड़ी मुख्य कल्याणकारी योजनाओं जैसे PM-KISAN, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), और सॉयल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) के छूटे हुए लाभार्थियों को सीधे जोड़ना। 

अभियान संबंधी कार्यान्वयन ढांचा: इस अभियान को सफल बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), देश के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और राज्य कृषि विभागों को एकीकृत किया गया है।

  1. वैज्ञानिकों की टीमें: देशभर में 1,150 से अधिक बहुविषयक वैज्ञानिक टीमें और 1,600 से अधिक दल सीधे गांवों में जाकर लाइव सॉयल टेस्टिंग और व्यावहारिक खेत प्रदर्शन (Field Demonstrations) कर रहे हैं। 
  2. जागरूकता शिविर: अभियान के प्रारंभिक चरणों में ही 12,979 से अधिक जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए जा चुके हैं, जिससे लगभग 7.17 लाख किसान सीधे जुड़े हैं।
  3. व्यापक पहुंच: डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, FPOs और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के बहुस्तरीय नेटवर्क के माध्यम से यह अभियान देश के 2.71 करोड़ से अधिक नागरिकों तक अपनी पहुंच बना चुका है।

अभियान का महत्व:

  • पारिस्थितिक लाभ (Ecological Benefits): रसायनों के कम उपयोग से भूजल प्रदूषण (Groundwater Pollution) रुकेगा और मिट्टी की जैविक सामग्री (Organic Matter) में सुधार होगा।
  • आर्थिक लाभ (Economic Viability): वैज्ञानिक खाद प्रबंधन और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को अपनाने से किसानों की लागत कम होगी, जिससे उनकी शुद्ध आय में वृद्धि होगी।

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