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भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (India-UK Critical Minerals Global Supply Chain Observatory)

भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (India-UK Critical Minerals Global Supply Chain Observatory)

India-UK Critical Minerals Global Supply Chain Observatory

संदर्भ:

हाल ही में भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने India UK Critical Minerals Partnership के तहत आधिकारिक तौर पर इंडिया-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO) लॉन्च की।

इंडिया–यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO):

इंडिया–यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (GSCO) नई दिल्ली में स्थित एक अत्याधुनिक, डेटा-संचालित और प्रौद्योगिकी-समर्थित द्विपक्षीय इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। 

  • यह डिजिटल मंच वैश्विक स्तर पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे- लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ पृथ्वी तत्व) के प्रवाह, बाजार की प्रवृत्तियों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता का वास्तविक समय में विश्लेषण करने वाली एक विशेष वेधशाला है। 
  • इस रणनीतिक वेधशाला की नींव पहली बार अक्टूबर 2025 में भारत और यूके के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रखी गई थी। इसके बाद, मार्च 2026 में दोनों पक्षों ने एक औपचारिक ‘अनुसंधान सहयोग समझौते’ (Research Collaboration Agreement) पर हस्ताक्षर किए।
  • यह वेधशाला एक त्रिपक्षीय अकादमिक और सरकारी सहयोग का परिणाम है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
  • TEXMiN: आईआईटी (ISM) धनबाद में स्थापित भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-ISM) धनबाद: भारत की ओर से नोडल शैक्षणिक और कार्यान्वयन केंद्र।
  • कैंब्रिज विश्वविद्यालय (University of Cambridge): यूनाइटेड किंगडम की ओर से अग्रणी वैश्विक अनुसंधान भागीदार (विशेष रूप से इसका इंस्टीट्यूट फॉर मैन्युफैक्चरिंग – IfM)।

उद्देश्य:

  • संसाधन सुरक्षा: आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), उन्नत विनिर्माण और हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुरक्षित करना।
  • बाजार विविधीकरण: कुछ विशिष्ट देशों के प्रसंस्करण एकाधिकार (जैसे चीन) से उत्पन्न होने वाले भू-राजनीतिक खतरों और आपूर्ति झटकों से दोनों देशों की रक्षा करना। 
  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण: नीति निर्माताओं, उद्योगों और शोधकर्ताओं को आपूर्ति जोखिमों से निपटने के लिए सटीक डेटा-आधारित इंटेलिजेंस प्रदान करना। 

परिचालन ढांचा:

GSCO का परिचालन ढांचा व्यापक ‘इंडिया–यूके टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव’ (Technology Security Initiative – TSI) के तहत काम करता है। यह प्लेटफॉर्म डेटा एनालिटिक्स और उन्नत ट्रैकिंग एल्गोरिदम के माध्यम से काम करता है जो वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी भी प्रकार की रुकावट, लॉजिस्टिक बाधाओं या अचानक लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों की अग्रिम पहचान कर संबंधित सरकारी विभागों को सीधे इनपुट प्रदान करता है।

महत्व:

  • नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) को मजबूती: यह वेधशाला भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ₹16,300 करोड़ के बजटीय आवंटन वाले National Critical Mineral Mission (NCMM) के लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 
    • यह देश के भीतर खनिजों की खोज (Exploration), प्रसंस्करण (Processing) और रीसाइक्लिंग (Recycling) रणनीतियों को सही दिशा देने के लिए आवश्यक इंटेलिजेंस डेटा प्रदान करेगी।
  • आपूर्ति विविधीकरण: भारत अपनी कई तकनीकी और रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए खनिजों के आयात पर अत्यधिक निर्भर है। 
    • GSCO के माध्यम से भारत अपने आयात स्रोतों में विविधता ला सकेगा और चीन जैसे देशों पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए नए, विश्वसनीय और लोकतांत्रिक वैश्विक खनिज साझेदारों (जैसे खनिज सुरक्षा साझेदारी – MSP) की पहचान कर सकेगा। 
  • हरित ऊर्जा संक्रमण: भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों जैसे नेट-जीरो उत्सर्जन, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EVs), ग्रिड-स्केल बैटरी स्टोरेज और घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण (जैसे Atmanirbhar Bharat पहल) के सफल कार्यान्वयन के लिए खनिज सुरक्षा सबसे अनिवार्य शर्त है, जिसे यह वेधशाला सुनिश्चित करती है। 

FAQs:

Q. भारत-ब्रिटेन क्रिटिकल मिनरल्स ऑब्जर्वेटरी क्या है?

यह भारत-यूके की संयुक्त डिजिटल पहल है, जो लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक जोखिमों की वास्तविक समय में निगरानी करती है।

Q. Why are critical minerals important?

ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सौर पैनल, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के निर्माण के साथ-साथ ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य हासिल करने के लिए अत्यंत अनिवार्य हैं।

Q. How will India benefit from this partnership?

इससे भारत को चीन पर निर्भरता कम करने, सटीक बाजार डेटा प्राप्त करने, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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