उत्तर पूर्वी परिषद (North Eastern Council)
संदर्भ:
हाल ही में शिलांग, मेघालय में केंद्रीय गृह मंत्री और NEC के अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में उत्तर पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC) का 73वां पूर्ण सत्र संपन्न हुआ।
उत्तर पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC):
- परिचय: उत्तर पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC) पूर्वोत्तर भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक शीर्ष और सांविधिक (Statutory) संस्था है।
- यह परिषद पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में संतुलित विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाली एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है।
- सांविधिक निकाय: NEC एक संवैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि संसद द्वारा पारित उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971 (NEC Act, 1971) के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है।
- शुरुआत: इस परिषद ने 7 नवंबर 1972 से औपचारिक रूप से शिलांग (मेघालय) में कार्य करना शुरू किया था।
- नोडल मंत्रालय: यह परिषद भारत सरकार के DoNER (Development of North Eastern Region) मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है।
- संगठनात्मक संरचना: NEC की संगठनात्मक संरचना सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उत्कृष्ट उदाहरण है:
- अध्यक्ष (Chairman): भारत के केंद्रीय गृह मंत्री इसके पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होते हैं।
- उपाध्यक्ष (Vice-Chairman): DoNER मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री इसके पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।
- सदस्य: इसमें पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल (Governors) और मुख्यमंत्री (Chief Ministers) शामिल होते हैं।
- नामित सदस्य: भारत के राष्ट्रपति द्वारा तीन सदस्यों को नामित किया जाता है।
- सदस्य राज्य: मूल रूप से इसमें 7 राज्य (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा) शामिल थे, जिन्हें ‘7 सिस्टर्स’ कहा जाता है. वर्ष 2002 में अधिनियम में संशोधन करके सिक्किम को परिषद के 8वें सदस्य राज्य के रूप में शामिल किया गया।
मुख्य कार्य:
- क्षेत्रीय योजना निकाय (Regional Planning Body): वर्ष 2002 के संशोधन के बाद, NEC को सिर्फ एक सलाहकार निकाय से अपग्रेड करके पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय योजना निकाय का दर्जा दिया गया है।
- अंतर-राज्यीय समन्वय: यह ऐसे मुद्दों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चर्चा और निष्पादन करता है, जिनमें दो या दो से अधिक राज्यों का साझा हित शामिल हो।
- विवादों का समाधान: यह सदस्य राज्यों के बीच सीमा, परिवहन या नदी जल से जुड़े अंतर-राज्यीय विवादों में मध्यस्थता का मंच प्रदान करता है।
- सुरक्षा की समीक्षा: परिषद अधिनियम की धारा 4 के तहत क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था (Security and Public Order) की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा करती है।
- विकासात्मक क्षेत्र: NEC निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष योजनाएं बनाकर वित्तीय सहायता प्रदान करता है:
- परिवहन और संचार: सड़कों, पुलों और क्षेत्रीय हवाई अड्डों का निर्माण (जैसे 10,500 किमी से अधिक सड़कों का विकास)।
- ऊर्जा और जल प्रबंधन: क्षेत्र में बिजली परियोजनाओं और बाढ़ नियंत्रण (Flood Control) प्रणालियों का समन्वय।
- कृषि और संबद्ध क्षेत्र: बांस (Bamboo), अगरवुड (Agarwood) की खेती और बागवानी को बढ़ावा देना।
- मानव संसाधन और रोजगार: युवाओं के लिए कौशल विकास (Skill Development), आईटी हब और खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
क्षेत्रीय परिषदों (Zonal Councils) से भिन्नता:
यद्यपि इसका कार्य राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना है, फिर भी यह गृह मंत्रालय के तहत आने वाली सामान्य ‘क्षेत्रीय परिषदों’ (Zonal Councils) से अलग है।
- क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत बनी हैं, जबकि NEC के लिए एक समर्पित संसद अधिनियम (1971) है और इसका अपना अलग बजटीय आवंटन तथा सचिवालय (शिलांग) है।
FAQs:
1. उत्तर पूर्वी परिषद क्या है?
उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) उत्तर-पूर्वी राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 1972 में स्थापित एक वैधानिक क्षेत्रीय योजना निकाय (Statutory Regional Planning Body) है।
2. What are the functions of NEC?
NEC क्षेत्र में बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली), वित्तीय सहायता, साझा परियोजनाओं के वित्तपोषण, तकनीकी सहायता और सुरक्षा मामलों पर केंद्र-राज्यों को महत्वपूर्ण परामर्श प्रदान करता है।
3. How does NEC support Northeast India?
यह परिषद बजटीय सहायता, परिवहन संपर्क (Connectivity), स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण, कौशल विकास और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देकर पूर्वोत्तर भारत का व्यापक समर्थन करती है।
4. North Eastern Council objectives and significance?
इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता दूर करना, सुरक्षा बढ़ाना और सतत विकास सुनिश्चित करना है। यह सहकारी संघवाद तथा एक्ट ईस्ट नीति का एक मजबूत स्तंभ है।
