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स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर (Zorawar Light Tank)

स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर (Zorawar Light Tank)

Zorawar Light Tank

संदर्भ: 

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सूरत स्थित लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के हजीरा आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स का दौरा किया जहां उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी लाइट टैंक ‘जोरावर’ (Zorawar Light Tank) की समीक्षा की।

स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक के बारे में:

  • परिचय: जोरावर (Zorawar Light Tank) भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और विकसित किया गया एक आधुनिक हल्का युद्धक टैंक है। 
    • इसे मुख्य रूप से ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तीव्र सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। 
  • पृष्ठभूमि: वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के साथ हुए सैन्य गतिरोध के बाद इस टैंक की आवश्यकता महसूस की गई थी। 
    • भारतीय सेना के पास मौजूद भारी-भरकम ‘मुख्य युद्धक टैंक’ (MBTs) जैसे T-90 और T-72 (वजन 45-50 टन) अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और लद्दाख के संकरे रास्तों पर तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम नहीं थे। इसके विपरीत, चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने फुर्तीले ‘टाइप-15’ (Type-15) लाइट टैंक तैनात कर दिए थे। इस रणनीतिक असंतुलन को दूर करने के लिए भारतीय सेना ने ‘प्रोजेक्ट जोरावर’ की शुरुआत की। 
    • इस टैंक का नाम 19वीं सदी के महान डोगरा जनरल जोरावर सिंह कहलूरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने लद्दाख और तिब्बत की कठिन विजय यात्राओं का नेतृत्व किया था। 
  • निर्माणकर्ता: जोरावर टैंक का सफल विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) का एक बेहतरीन उदाहरण है। 
    • इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की चेन्नई स्थित प्रयोगशाला ‘कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (CVRDE) ने भारतीय निजी क्षेत्र की अग्रणी रक्षा कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ मिलकर मात्र 2-3 वर्षों के रिकॉर्ड समय में डिजाइन और निर्मित किया है। 
    • इसके अलावा, गुजरात और महाराष्ट्र (जैसे सूरत, राजकोट, वडोदरा) के कई स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने इसके गियर मैकेनिज्म, कूलिंग सिस्टम और स्वदेशी पुर्जों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रमुख विशेषताएं: 

  • वजन और गतिशीलता: जोरावर का अधिकतम वजन लगभग 25 टन है। 
    • हल्का होने के कारण इसे भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमानों द्वारा सीधे लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से एयरलिफ्ट किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 70 किमी/घंटा है। 
  • अग्निशक्ति (Firepower): यह टैंक 105 मिमी की राइफल्ड गन और एक आधुनिक ऑटोलोडर से लैस है, जो पहाड़ों में ऊंचे कोणों (High Angles) पर सटीक गोलाबारी कर सकता है। 
    • इसके साथ ही इसमें तीसरी पीढ़ी की ‘नाग मार्क-2’ (Nag Mk-II) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और 12.7 मिमी की रिमोट-नियंत्रित गन लगाई गई है।
  • उन्नत रबर ट्रैक्स: इसमें पारंपरिक स्टील के बजाय कंपोजिट रबर-बैंड ट्रैक्स का उपयोग किया गया है। 
    • यह तकनीक टैंक का वजन कम करती है, बर्फ और पत्थरों पर मजबूत पकड़ देती है और शोर को 13 डेसिबल तक कम करके इसे दुश्मनों की नजरों से छिपाने में मदद करती है। 
  • अम्फिबियस (उभयचर) क्षमता: यह टैंक वॉटर-जेट प्रोपल्शन की सहायता से नदियों और पैंगोंग त्सो जैसी गहरी झीलों को तैरकर पार करने में पूरी तरह सक्षम है।
  • आधुनिक तकनीक: जोरावर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इनेबल्ड फायर कंट्रोल सिस्टम, ड्रोन एकीकरण (स्वयं का निगरानी ड्रोन) और थर्मल सिग्नलों को छिपाने के लिए ‘एडैप्टिव थर्मल कैमलाज’ तकनीक जोड़ी गई है। 

महत्व: 

यह पहाड़ों में तैनात भारतीय सैनिकों को त्वरित गतिशीलता, सुरक्षा और विनाशकारी अग्निशक्ति प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देती है, जिससे रक्षा आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी। 

  • सफल मरुस्थलीय और उच्च-ऊंचाई परीक्षणों के बाद भारतीय सेना इसे वर्ष 2028-2029 तक अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर देगी।

FAQs:

Q1. What is the Zorawar Light Tank?

जोरावर भारत का पहला स्वदेशी लाइट (हल्का) टैंक है। इसे डीआरडीओ (DRDO) और एलएंडटी (L&T) ने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में युद्ध के लिए विकसित किया है। 

Q2. जोरावर टैंक की विशेषताएं क्या हैं?

यह 25 टन वजनी टैंक है, जिसमें 105mm गन, एंटी-टैंक मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता, थर्मल कैलाज और पानी में तैरने (अम्फिबियस) की क्षमता है। 

Q3. Why is the Indian Army developing the Zorawar tank?

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के लाइट टैंकों (Type-15) का मुकाबला करने और लद्दाख जैसे ऊंचे व संकरे पहाड़ी इलाकों में त्वरित तैनाती के लिए। 

Q4. How will Zorawar improve India’s defence capabilities?

यह कम वजन के कारण हवाई मार्ग (C-17 विमान) से पहाड़ों में तुरंत तैनात हो सकता है, जिससे दुर्गम सीमाओं पर सेना की गतिशीलता और मारक क्षमता बढ़ेगी।

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