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किरथई-II जलविद्युत परियोजना (Kirthai-II Hydroelectric Project) 

किरथई-II जलविद्युत परियोजना (Kirthai-II Hydroelectric Project) 

Kirthai-II Hydroelectric Project

संदर्भ:

भारत सरकार ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी (Chenab River) पर स्थित लंबे समय से लंबित किरथई-II जलविद्युत परियोजना (Kirthai-II Hydroelectric Project) को पुनर्जीवित (Revived) करने का निर्णय लिया है। 

  • यह कदम भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty – IWT) को स्थगित (Placing in abeyance) करने के ऐतिहासिक और रणनीतिक फैसले के एक साल बाद आया है।

किरथई-II जलविद्युत परियोजना की प्रमुख विशेषताएं: 

  • भौगोलिक अवस्थिति: यह परियोजना जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले (Kishtwar District) के पाद्दर तहसील में चिनाब नदी पर स्थित है।
    • चिनाब नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति में चंद्रा और भागा (Chandra and Bhaga) नदियों के संगम से होता है। 
    • यह सिंधु नदी प्रणाली की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी सहायक नदी है। 
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: किरथई योजना की परिकल्पना पहली बार वर्ष 1984 में की गई थी। हालांकि, यह परियोजना लगभग 42 वर्षों तक ठंडे बस्ते में रही, इसके मुख्य कारण:
  • सिंधु जल संधि (IWT) के तहत चिनाब एक पश्चिमी नदी (Western River) है, जिसके पानी के असीमित उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को प्राप्त था। 
  • पाकिस्तान ने इस परियोजना के तकनीकी डिजाइन और जल भंडारण क्षमताओं पर स्थाई सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) के समक्ष लगातार आपत्तियां दर्ज कराईं, जिससे यह परियोजना दशकों तक रुकी रही।
  • क्षमता (Power Generation Capacity): इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल प्रस्तावित क्षमता 930 मेगावाट (MW) है।
  • प्रकार (Project Type): यह एक रन-ऑफ-रिवर (Run-of-River) योजना है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग किया जाता है।
  • जलाशय क्षमता: इसकी नियोजित जलाशय क्षमता 51.26 मिलियन क्यूबिक मीटर है। 
  • ढांचागत संरचना: परियोजना के अंतर्गत चिनाब नदी पर एक 121 मीटर ऊंचा कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण बांध (Concrete Gravity Dam), 4.29 किमी लंबी हेडरेस टनल और एक 840 मेगावाट का भूमिगत पावरहाउस (Underground Powerhouse) शामिल है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी (Implementing Agency): इस परियोजना का विकास चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (CVPPPL) द्वारा किया जा रहा है, जो NHPC Limited (51%) और जम्मू-कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम (JKSPDC) का संयुक्त उद्यम है। 

Kirthai II Project का भू-राजनीतिक निहितार्थ:

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और सीमा पार आतंकवाद के विरोध में 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि (IWT) को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। 

  • परामर्श प्रक्रिया का बायपास (Bypassing Consultations): संधि के स्थगित होने से पाकिस्तान के साथ अनिवार्य परामर्श और तकनीकी आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके परिणामस्वरूप भारत को अपनी घरेलू सीमाओं के भीतर जल संसाधनों के त्वरित विकास की पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई है।
  • अन्य रणनीतिक परियोजनाएं: किरथई-II के अलावा भारत अब सिंधु बेसिन में सावलकोट (Sawalkote), रतले (Ratle), बुरसर (Bursar), पाकल दुल (Pakal Dul), क्वार (Kwar) और कीरू (Kiru) जैसी कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी तीव्र गति (Fast-track) से आगे बढ़ा रहा है।

जम्मू कश्मीर जलविद्युत परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण आयाम:

ऊर्जा सुरक्षाजम्मू-कश्मीर और उत्तरी ग्रिड को 3,329.52 मिलियन यूनिट (MU) वार्षिक स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त होगी, जो ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करेगी।
क्षेत्रीय विकासकिश्तवाड़ क्षेत्र उत्तर भारत के एक प्रमुख पावर हब (Power Hub) के रूप में उभरेगा, जिससे स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को बढ़ावा मिलेगा।
जल कूटनीतियह कदम अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के कड़े रणनीतिक रुख (Hard-power stance) और ‘आतंकवाद और जल वार्ता एक साथ नहीं चल सकते’ की नीति को पुख्ता करता है।
पर्यावरणीय चुनौतियांइस परियोजना के लिए लगभग 142.25 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की आवश्यकता है, जिससे पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना एक चुनौती होगी।

FAQs:

1. किरथई-II जलविद्युत परियोजना क्या है?
यह चिनाब नदी पर बनने वाली एक रन-ऑफ-रिवर (Run-of-River) जलविद्युत परियोजना है, जिसे हाल ही में सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पुनर्जीवित किया गया है. 

2. यह परियोजना कहाँ स्थित है?
यह महत्वाकांक्षी परियोजना जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की पाद्दर तहसील में चिनाब नदी के बेसिन पर स्थित है. 

3. इसकी क्षमता कितनी है?
इस विशाल जलविद्युत परियोजना की कुल प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता 930 मेगावाट (MW) निर्धारित की गई है.

 4. परियोजना का महत्व क्या है?
यह ग्रिड को 3329.52 MU स्वच्छ ऊर्जा देगी, स्थानीय रोजगार बढ़ाएगी और सिंधु बेसिन पर भारत के रणनीतिक जल नियंत्रण को मजबूत करेगी.पित नहीं किए जा सकते।

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