G7 Summit 2026 में भारत की उपस्थिति
संदर्भ:
52वें G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) में भारत की भागीदारी ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती कूटनीतिक धमक और India Global Leadership को सिद्ध किया है।
- 15 से 17 जून 2026 तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत को एक प्रमुख ‘साझेदार देश’ (Partner Country) के रूप में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
- यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार सातवीं और वैश्विक स्तर पर भारत की 13वीं उपस्थिति है, जो भारत की सुदृढ़ विदेश नीति (Foreign Policy India) को दर्शाती है।
G7 शिखर सम्मेलन 2026 में भारत संबंधी मुख्य बिंदु:
- भारतीय कूटनीति का नेतृत्व: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आउटरीच सत्रों में वैश्विक नेताओं के समक्ष भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) का दृष्टिकोण रखा।
- विशेष सत्र में भागीदारी: पीएम मोदी ने ‘नई साझेदारियां गढ़ना और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण’ (Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity) विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया।
- तकनीकी कूटनीति: भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ (Bharat Innovates) पहल का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य डीप टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार में सहयोग को मजबूत करना है।
शिखर सम्मेलन में भारत के मुख्य फोकस क्षेत्र:
प्रधानमंत्री मोदी ने G7 Leaders Meeting के दौरान कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया:
- वैश्विक विश्वास की कमी (Trust Deficit): पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज की दुनिया ‘विश्वास की कमी’ से जूझ रही है। उन्होंने विकास के लिए असमान समझौतों के बजाय बराबर की साझेदारी (Equal Partnerships) विकसित करने का आह्वान किया।
- समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया संकट: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव के बीच, प्रधानमंत्री ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से समुद्री व्यापार में आने वाले व्यवधानों पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
- रणनीतिक द्विपक्षीय बैठकें: सम्मेलन से इतर पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सहित कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर Strategic Partnerships को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय वार्ता की।
महत्व:
- ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत स्वयं को विकासशील देशों (Global South) के एक मजबूत पुल के रूप में स्थापित कर रहा है, जो पश्चिमी शक्तियों (G7) और विकासशील दुनिया के हितों के बीच संतुलन बनाता है।
- मल्टी-अलाइनमेंट नीति: भारत एक तरफ ब्रिक्स (BRICS) का संस्थापक सदस्य है और दूसरी तरफ G7 में उसकी लगातार भागीदारी यह दर्शाती है कि समकालीन International Diplomacy में भारत किसी एक गुट तक सीमित नहीं है।
- आर्थिक स्थिरता और खनिज सुरक्षा: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए G7 द्वारा शुरू की गई क्रिटिकल मिनरल्स वैल्यू चेन (Critical Minerals Value Chains) पहल में भारत की भागीदारी देश के तकनीकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए भविष्य में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
FAQs:
Q1. G7 Summit 2026 में भारत की भूमिका क्या रही?
Ans. भारत इस सम्मेलन में एक प्रमुख विशिष्ट आमंत्रित भागीदार देश के रूप में शामिल हुआ। पीएम मोदी ने आउटरीच सत्र में ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधित्व किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक व्यापार सुरक्षा तथा न्यायसंगत विकास पर भारत का रोडमैप साझा किया।
Q2. भारत को G7 में क्यों आमंत्रित किया गया?
Ans. यद्यपि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति (PPP के आधार पर) होने के नाते, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति से जुड़े किसी भी बड़े संकट का समाधान भारत के बिना संभव नहीं है।
Q3. प्रधानमंत्री मोदी ने किन मुद्दों पर चर्चा की?
Ans. पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपसी विश्वास की कमी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार व्यवधान, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार (Bharat Innovates) और वैश्विक ऋण संकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
Q4. G7 शिखर सम्मेलन का महत्व क्या है?
Ans. यह दुनिया की सात सबसे उन्नत और औद्योगिक रूप से शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा) का मंच है। इस वर्ष इसका महत्व यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में नए शांति समझौतों के बाद वैश्विक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में और बढ़ गया है।
Q5. भारत को इससे क्या लाभ होगा?
Ans. इससे भारत को पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को गति देने का अवसर मिलता है। साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स, डीप टेक और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग हासिल करने का सीधा लाभ मिलेगा।
