भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म
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संदर्भ:
हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जापान सरकार के साथ मिलकर ‘भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म’ (India Japan Joint Crediting Mechanism) के परिचालन और कार्यान्वयन नियमों (Rules of Implementation) को आधिकारिक तौर पर अपनाया।
India Japan Joint Crediting Mechanism (JCM) क्या है?
- परिचय: ‘Joint Crediting Mechanism (JCM)’ जापान द्वारा शुरू किया गया एक बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय ‘Carbon Credit Mechanism’ है, जो पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के सिद्धांतों के तहत कार्य करता है।
- इसके तहत जापानी संस्थाएं/कंपनियां भागीदार देश (जैसे भारत) में उन्नत ‘Green Technology’ और वित्तीय निवेश के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी लाने वाली परियोजनाएं स्थापित करती हैं।
- इन परियोजनाओं से प्राप्त होने वाले प्रमाणित कार्बन उत्सर्जन में कटौती को ‘Carbon Market’ के नियमों के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रूप से ‘कार्बन क्रेडिट’ के रूप में साझा किया जाता है।
- उद्देश्य: अत्याधुनिक तकनीकों के प्रसार के माध्यम से भारत के सघन उद्योगों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को मात्रात्मक रूप से कम करना।
- जापान की अग्रणी डीकार्बोनाइजेशन और ‘Green Technology’ को भारतीय विनिर्माण, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में स्थानीय रूप से तैनात करना।
- दोनों देशों को उनके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और वैश्विक ‘Net Zero Emissions’ प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने में मदद करना।
- निवेश और क्षमता निर्माण के जरिए भारत में पर्यावरण के अनुकूल ‘Sustainable Development’ को जमीनी स्तर पर गति देना।
- पृष्ठभूमि: दोनों देशों ने पिछले वर्ष (अगस्त 2025) इसके लिए सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे अब अंतिम परिचालन नियम बनाकर लागू कर दिया गया है।
मुख्य विशेषताएं:
- संयुक्त समिति का गठन (Joint Committee): इस मैकेनिज़्म के संचालन, परियोजनाओं की मंजूरी और क्रेडिट आवंटन की निगरानी के लिए दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों वाली एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति स्थापित की गई है।
- तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापन (Third-Party Validation): उत्सर्जन में होने वाली किसी भी कटौती को केवल दावों के आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा; स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा इसकी कठोर जांच और सत्यापन (V&V) अनिवार्य है।
- राष्ट्रीय रजिस्ट्रियां (National Registries): कार्बन क्रेडिट की ट्रैकिंग, स्वामित्व और हस्तांतरण पर नजर रखने के लिए दोनों देशों की रजिस्ट्रियों को सिंक्रोनाइज़ किया गया है।
- डबल काउंटिंग की रोकथाम (No Double Counting): नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि हस्तांतरित कार्बन क्रेडिट को दोनों देश एक साथ अपने एनडीसी (NDC) में न जोड़ें, जिससे पर्यावरणीय अखंडता बनी रहे।
महत्व:
- वित्तीय अंतर को पाटना (Green Finance): भारत को भारी उद्योगों को डीकार्बोनाइज करने और पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए भारी मात्रा में ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ की आवश्यकता है। यह तंत्र वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के रूप में कार्य करता है।
- लागत प्रभावी उन्नत तकनीक: हाइड्रोजन, अमोनिया, और उन्नत ऊर्जा दक्षता जैसी जापानी स्वच्छ तकनीकें अत्यधिक महंगी हैं। JCM के माध्यम से भारतीय उद्योगों को यह तकनीकें आसानी से सुलभ हो जाती हैं
- क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप का सुदृढ़ीकरण: यह मैकेनिज़्म भारत और जापान के बीच रणनीतिक ‘Clean Energy Partnership’ को नई आर्थिक और व्यावहारिक ऊंचाई प्रदान करता है।
- बाजार आधारित प्रोत्साहन: यह जापानी निवेशकों को भारत के हरित संक्रमण में पूंजी लगाने के लिए अतिरिक्त राजस्व (कार्बन क्रेडिट की बिक्री के माध्यम से) का लालच देकर प्रोत्साहित करता है।
- ग्लोबल क्लाइमेट लीडरशिप: भारत द्वारा कार्यान्वयन नियमों को अपनाना वैश्विक जलवायु एजेंडे के प्रति उसकी ठोस प्रतिबद्धता को दर्शाता है और अन्य विकासशील देशों के लिए एक मानक स्थापित करता है।
FAQs:
Q1. भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म क्या है?
Ans: यह पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत दोनों देशों के बीच कार्बन क्रेडिट के व्यापार और हरित तकनीक सहयोग का एक द्विपक्षीय ढांचा है।
Q2. इसका उद्देश्य क्या है?
Ans: इसका उद्देश्य भारत में उन्नत जापानी तकनीक से कार्बन उत्सर्जन घटाना और उत्पन्न क्रेडिट को दोनों देशों के एनडीसी लक्ष्यों के लिए साझा करना है।
Q3. भारत को इससे क्या लाभ होगा?
Ans: भारत को बिना किसी वित्तीय बोझ के जापान की महंगी डीकार्बोनाइजेशन तकनीक, भारी निवेश और नेट-जीरो 2070 लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
Q4. Carbon Credit क्या होता है?
Ans: यह एक प्रमाण पत्र है जो हवा से एक टन कार्बन डाइऑक्साइड या समकक्ष ग्रीनहाउस गैस को कम करने या हटाने को प्रमाणित करता है।
Q5. JCM कैसे कार्य करता है?
Ans: जापानी कंपनियां भारत में पर्यावरण परियोजनाएं लगाती हैं, जिसके सत्यापित उत्सर्जन लाभों को संयुक्त समिति दोनों देशों की रजिस्ट्रियों में क्रेडिट स्वरूप आवंटित करती है।
